लखीमपुर/ओयल। तेज़ रफ्तार जिंदगी, अनियमित दिनचर्या और बिगड़ता खानपान आज लोगों को धीरे-धीरे बीमार बना रहा है। कभी उम्र के अंतिम पड़ाव पर दिखने वाली मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और पाचन संबंधी बीमारियां अब युवाओं में भी आम होती जा रही हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि समय रहते जीवनशैली में सुधार न किया गया, तो ये रोग गंभीर रूप ले सकते हैं।
जिला अस्पताल के यूनानी चिकित्सा विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 75 से 80 मरीज परामर्श ले रहे हैं। आयुष यूनिट के अंतर्गत संचालित योग ओपीडी में भी रोजाना 35 से 40 मरीज पहुंच रहे हैं।
यूनानी चिकित्सक डॉ. मो. जैगम ने बताया कि उनके पास सबसे अधिक मरीज शुगर, ब्लड प्रेशर, नसों से जुड़ी समस्याओं और जोड़ों के दर्द से संबंधित आ रहे हैं। यूनानी चिकित्सा पद्धति में रोग के मूल कारण पर ध्यान देकर उपचार किया जाता है, जिससे बिना किसी दुष्प्रभाव के बेहतर परिणाम मिलते हैं।
-नशे की लत भी छुड़ा रही-
डॉ. जैगम के अनुसार आयुष यूनिट में यूनानी चिकित्सा पाचन संबंधी रोगों, नशे की लत, जोड़ों के दर्द और नसों की बीमारियों में अधिक कारगर साबित हो रही है। उन्होंने मधुमेह के मरीजों को चावल, आलू, अधिक कार्बोहाइड्रेट और वसा युक्त भोजन से परहेज करने की सलाह दी, जबकि उच्च रक्तचाप से पीड़ित मरीजों को नमक और जंक फूड कम करने की आवश्यकता बताई। चिकित्सक ने कहा कि नियमित व्यायाम और योग को दिनचर्या में शामिल करने से दवाओं पर निर्भरता भी कम की जा सकती है। किसी भी प्रकार की समस्या होने पर मरीज जिला अस्पताल पहुंचकर यूनानी और योग विशेषज्ञों से परामर्श ले सकते हैं।