कस्बे से मात्र दो किमी की दूरी पर बह रही मोहाना नदी ने कटान कर ग्राम उमेशनगर का वजूद मिटा दिया है। मौके पर पहुंचे एसडीएम ने बेघर हुए गांव वालों को मंडी समिति में शरण लेने को कहा। साथ ही कटे हुए घरों के मुआवजे के लिए लेखपाल को मौके पर सूची बनाने के लिए निर्देशित किया।
बार्डर पर ग्राम पंचायत सूरतनगर के करीब 40 परिवारों का मजरा गांव उमेशनगर में बुधवार रात करीब 11 बजे भगदड़ मच गई। दहशत में लोग अपने घरों में रखी सामग्री निकालने का साहस तक नहीं कर सके। इससे उनका राशन समेत सारा घरेलू सामान बह गया। देखते ही देखते नदी ने शेष बचे 20 घरों को अपने आगोश में ले लिया। इस बीच सूचना पाकर मौके पर पहुंचे एसडीएम ने पीड़ित परिवारों की सूची तैयार कर शीघ्र ही मुआवजा देने का आश्वासन दिया। साथ ही कोटेदार को राशन वितरण करने का निर्देश दिया। कटान पीड़ित दूधनाथ, शिवशंकर, उमेश, गणेश, जयराम, शिवनरायन, रमेश, रामासिंह ने कहा कि खेत व घर नदी में समाने की वजह से उनके सामने मजदूरी करने के सिवाए और कोई चारा नही बचा है।
महज एक किमी दूर है मैलानी-गोंडा रेलवे लाइन
ग्रामीणों का कहना है कि नदी ग्राम टांड़ा व कौड़ियाला गुरुद्वारा और मैलानी-गोंडा रेलवे लाइन से करीब एक किमी नजदीक पहुंच गई है। जिसको लेकर ग्रामीणों में और दहशत बढ़ती जा रही है। उधर गुरुद्वारा के निकट तेजी से बढ़ रही नदी को लेकर सिख समाज सहित गुरुद्वारा के बाबा काला सिंह ने चिंता जताई है।
नेपाल का संपर्क मार्ग भी कटा
मोहाना नदी के कटान में तिकुनियां मंडी से टांड़ा गांव होते हुए नेपाल जाने का पूरा रास्ता कट गया है। जिसके चलते नेपाली नागरिकों के लिए आवागमन का संकट पैदा हो गया है। नदी के पार ग्राम पंचायत के बसे गांव चौर्गुजी के करीब तीन सौ परिवारों को एक किमी. नदी की चौड़ाई नाव से पार कर गांव जाना पड़ रहा है।