लखीमपुर खीरी। तिकुनिया थाना क्षेत्र की किशोरी जहां दरिंदगी की भेंट चढ़ गई, वहीं पुलिस घटना की गंभीरता कम करने में पूरा जोर लगा रही है। पहले पंचनामा भरने वाले ने हैवानियत को कमतर आंकते हुए पंचनामा कंपलीट किया, उसके बाद डैमेज कंट्रोल करने के लिए पुलिस तकनीकी और पेचीदगी भरे बिंदुओं के सहारे अपनी जवाबदेही से बचने की कोशिश करने लगी। पुलिस जहां स्लाइड की जांच के बाद ही दुष्कर्म के पहलू पर कुछ बोलने की रणनीति पर है।
चार चिकित्सकों के पैनल के हवाले से जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो उसमें मौत से पहले की बारह चोटें स्पष्ट की गईं। इनमें प्राइवेट पार्ट सहित शरीर के विभिन्न हिस्से में चोटों शामिल हैं। इन चोटों से स्पष्ट होता है कि किशोरी के साथ कैसी हैवानियत की गई होगी। किशोरी भेजी गई स्लाइट की रिपोर्ट आने के बाद ही दुष्कर्म पर कुछ बोलने की बात कह रही है।
विलंब से भेजे गए नमूनों की जांच रिपोर्ट हो जाती है संदिग्ध
जिले के वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता सुरेश सिंह मुन्ना बताते हैं कि यौन हिंसा से जुडे मामलों में वेजाइनल स्वैब व स्लाइड लेने की प्रक्रिया, सैंपल को सुरक्षित रखना और शीघ्रता से पहुंचाना चुनौती भरा काम है। यदि शीघ्रता से और उचित रखरखाव के बिना सैंपल देर से लैब पहुंचते है, तो जांच रिपोर्ट की निश्चितता संदिग्ध हो जाती है। इसके साथ ही कई बार वास्तविक परिणाम सामने नहीं आ पाते हैं।
एसपी बोले- ली जा रही है विधिक राय
संदिग्ध आरोपी की पहचान की गई, करीबी पर ही शक
लखीमपुर खीरी। किशोरी की हत्या के मामले में एसपी गणेश प्रसाद साहा ने बताया कि मामले में संदिग्ध की पहचान हो गई है। सीओ निघासन को अभियुक्त को पहचानकर पकड़कर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, किशोरी के निजी अंगों पर चोट को लेकर कहा कि चोट तो है। स्लाइड भेजी गई है। विधिक राय ली जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट की पूरी स्टडी नहीं की है। तकनीकी पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है।