लखीमपुर खीरी के तराई क्षेत्र में साठा धान की रोपाई का सिलसिला शुरू हो गया है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि की उम्मीद है। हालांकि, इस फसल में अत्यधिक सिंचाई की आवश्यकता के कारण भूजल स्तर तेजी से नीचे गिरने की चिंताएं बढ़ गई हैं। कृषि विशेषज्ञ और स्थानीय लोग इस स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त कर रहे हैं, जो भविष्य में जल संकट का कारण बन सकती है।
धौरहरा क्षेत्र के कफारा, टापरपुरवा और गोसाइनपुरवा समेत आसपास के गांवों में किसान गेहूं की कटाई के तुरंत बाद खेतों में साठा धान की रोपाई में जुट गए हैं। इन दिनों खेतों में किसानों और मजदूरों की चहल-पहल बढ़ गई है। किसान तेजी से रोपाई का कार्य कर रहे हैं।
किसानों का कहना है कि साठा धान की फसल कम समय में तैयार हो जाती है। इससे उन्हें एक ही सीजन में दो बार धान की खेती का मौका मिलता है। पहली फसल काटने के बाद अगस्त माह में दोबारा धान की रोपाई कर ली जाती है। यह दोहरी फसल उनकी आमदनी में इजाफा करती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।