अपराध या षड्यंत्र में फंसकर कारागार में निरुद्ध बंदियों को मुख्य धारा से जोड़ने की पहल शुरू की गई है। जिला स्तरीय समिति ने बंदियों के कौशल विकास के लिए कारागार में ही शासन की नवीन योजनाओं को लागू करने की सिफारिश की है। कहा है कि बंदी जितने दिन भी कारागार में रहें, उन्हें कृषि, मत्स्य पालन समेत रोजगार की बारीकियों का प्रशिक्षण दिया जाए।
जिला जज बीडी मिश्रा, डीएम किंजल सिंह, एसपी अरविंद सेन, जेल अधीक्षक विनोद कुमार समेत तमाम अधिकारियों की मौजूदगी में बंदियों को भी शासन की योजनाओं से लाभान्वित करने सहित कई बिंदुओं पर रणनीति बनाई गई। जिसके बाद संबंधित विभागों के अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए गए। जिला स्तरीय समिति ने इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने विभागों से कार्ययोजना का अनुपालन कराएं। कारागार में 18 वर्ष से ज्यादा और 21 वर्ष से कम निरुद्ध लोगों को व्यावसायिक कौशल में निपुण बनाने के लिए जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला उद्योग केंद्र, उपायुक्त स्वत: रोजगार को वैज्ञानिक खेती का हुनर सिखाने और मत्स्य पालन के लिए प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया गया है। ताकि उन्हें सीधे तौर पर कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़ा जा सके।
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विकलांग बंदी भी जुड़ेंगे योजनाओं से
कारागार में 17 विकलांग बंदी विभिन्न मामलों में निरुद्ध हैं। जिला स्तरीय समिति ने कहा है कि विकलांग व्यक्तियों को जो सुविधाएं दी जा रही हों, वहीं सुविधाएं कारागार में निरुद्ध ऐसे सभी बंदियों को भी मुहैया कराई जाएं।
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बौद्धिक विकास भी जरूरी
बंदियों को कौशल विकास का हुनर सिखाने के साथ ही उनका बौद्धिक विकास भी जरूरी है। जिला स्तरीय समिति ने बंदियों के स्वास्थ्य मनोरंजन के लिए एक कक्ष के निर्माण की जरूरत बताई है। साथ ही कारागार मुख्यालय को पत्र भेजने को भी कहा है।
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कारागार में कार्य करने वालों की मजदूरी बढ़ाने की सिफारिश
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जिला जज की अध्यक्षता वाली समिति की बैठक में बनी सहमति
सहायक श्रम आयुक्त ने शासन और कारागार मुख्यालय भेजा पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। जिला जज बीडी मिश्रा की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समिति ने कारागार में निरुद्ध रहकर अपने परिवार की खातिर श्रम करने वाले बंदियों की पारिश्रमिक में बढ़ोतरी की सिफारिश की है। समिति के मुताबिक अकुशल बंदी को 259 रुपये, अर्द्धकुशल को 284 और कार्य में कुशल बंदी को 319 रुपये पारिश्रमिक देना चाहिए। समिति की सिफारिश के बाद सहायक श्रम आयुक्त ने शासन और कारागार मुख्यालय को पत्र भेज दिया है।
कारागार में अब तक महिला या पुरुष अकुशल बंदी को 25 रुपये, अर्द्धकुशल को 30 और कुशल को 40 रुपये देने का प्रावधान है। अप्रैल माह में इसी दर से 125 बंदियों को 79165 और मई माह में 127 बंदियों को 82500 रुपये का पारिश्रमिक दिया गया। जिला जज बीडी मिश्रा, सह अध्यक्ष डीएम किंजल सिंह, एसपी अरविंद सेन, सदस्य सचिव जेल अधीक्षक विनोद कुमार समेत 18 जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें बंदियों के पारिश्रमिक की भी समीक्षा की गई। समिति ने कहा कि जो बंदी कार्यालयों, गोदामों में श्रम करते हैं, उन्हें बेहद कम मजदूरी दी जा रही है। यह विचारणीय बिंदु है। समिति का मानना है कि बंदी के कारागार में निरुद्ध होने की वजह से उसका परिवार बेसहारा हो जाता है। ऐसे में पारिश्रमिक में बढ़ोतरी होने से बंदी के परिवार को बड़ा सहारा मिलेगा।
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नए पदों के सृजन की भी सिफारिश
जिला स्तरीय समिति ने कारागार में विद्युत मैकेनिक, एंबुलेंस चालक, जीप चालक, कंप्यूटर आपरेटर, फॉलोअर, ट्यूबवेल आपरेटर, स्टेनो, मनोरोग चिकित्सक, महिला चिकित्सक, डार्करूप अटेंडेंट और लैब टेक्निशियन के लिए नए पदों के सृजन की आवश्यकता बल दिया है। इस समय कारागार में विभिन्न संवर्गों में 139 पद हैं, लेकिन इसके सापेक्ष 99 कर्मचारी ही कार्यरत है।