फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ट्रेनों के बंद होने से चौपट होगा व्यापार, बढ़ेगी मुसीबत

विज्ञापन
विज्ञापन
लखीमपुर खीरी। मैलानी-नानपारा प्रखंड बंद होने से सबसे अधिक दिक्कत पलिया और उसके साथ लगे भीरा, बेलरायां और तिकुनियां क्षेत्र के लोगों को होगी। व्यापार चौपट हो जाएगा, जिससे विकास के मामले में यह इलाके कई साल पीछे चले जाएंगे। इसके अलावा बहराइच, गोंडा, बरेली, लखनऊ सहित अन्य महानगरों का सीधा संपर्क कट जाएगा। लोगों को आने-जाने में भी काफी दिक्कत उठानी पड़ेगी। समय के साथ ही तीन गुना अधिक यात्रा में धन व्यय करना पड़ेगा।
विज्ञापन

जिले को पूर्वांचल और रुहेलखंड से जोड़ने वाला इकलौता मैलानी-नानपारा रेल प्रखंड है। पलियाकलां में प्राइवेट व संपूर्णानगर और बेलरायां में सहकारी चीनी मिल होने के कारण बड़ी संख्या में गोंडा, बस्ती, बलरामपुर, देवरिया, बदायूं, बिहार आदि के लोग यहां बसे हैं। तमाम लोग चीनी मिलों में नौकरी करते हैं। व्यापार भी बरेली से जुड़ा था। आज से पांच साल पहले इस रूट पर ट्रेने गोंडा तक दौड़ती थीं। इससे लोगों को आवागमन करने में काफी सहूलियत थी। नानपारा (बहराइच) तक ब्रॉडगेज होने के कारण रेलवे प्रशासन ने ट्रेनों का संचालन नानपारा तक कर दिया। अब इस रूट को पूरी तरह से बंद करने का निर्णय रेलवे प्रशासन ने लिया है। ट्रेनों के संचालन बंद हो जाने से बेलरायां, तिकुनियां से पूर्वांचल और बरेली का सीधा संपर्क कट जाएगा। पूर्वांचल और बरेली के लिए इस क्षेत्र से कोई सीधी बस सेवा भी नहीं है। ट्रेनों के बंद होने पर लोगों को निजी और रोडवेज बसों से सफर करना पड़ेगा। इससे उन्हें समय के साथ तीन गुना अधिक जेबे ढीली करनी पड़ेंगी। कुल मिलाकर यातायात संसाधनों से यह पूरा इलाका पूरी तरह से वंचित हो जाएगा।
बस स्टेंड बना न बसों की बढ़ी संख्या
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित कसबा तिकुनियां से करीब दो किलोमीटर दूर ऐतिहासिक तीर्थ स्थल कौड़ियाला गुरुद्वारा है। यहां पर हजारों की संख्या में हर अमावस्या को श्रद्धालु ट्रेनों से बरेली, पीलीभीत, बहराइच, गोंडा आदि दूरदराज स्थानों से आकर मत्था टेकते हैं। व्यापारियों के काफी संघर्ष के बाद रोजवेज की इक्का-दुक्का बसों का संचालन किया गया। रोडवेज बस स्टैंड बना और न ही बसों की संख्या बढ़ाई गई। हालत यह है कि सुबह नौ बजे के बाद तिकुनियां से लखीमपुर व सीतापुर, बहराइच, गोंडा के लिए कोई रोडवेज बस नहीं है। लखनऊ दिल्ली जाने के लिए भी लोहे के चने चबाने पड़ते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें