लखीमपुर खीरी। चालू खरीफ सीजन में सरकारी धान खरीद को एक माह बीत चुका है, लेकिन क्रय केंद्रों पर खरीद आगे नही बढ़ पा रही है। क्रय एजेंसियां किसानों का धान खरीदने में हीला-हवाली कर रही हैं तो मंडी के व्यापारी व राइस मिलर्स औने-पौने दामों पर किसानों का धान खरीद रहे हैं। सरकारी क्रय केंद्रों पर 2040 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिकने वाला धान व्यापारियों व राइस मिलर्स द्वारा 1500 से 1700 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है। एक माह में व्यापारियों व राइस मिलर्स ने 11586 मीट्रिक टन से अधिक धान खरीद डाला है, तो वहीं सरकारी क्रय केंद्रों पर 17 किसानों से करीब 530 मीट्रिक टन धान खरीद हुई है।
किसानों से धान खरीदने के लिए जिले भर में कुल 154 क्रय केंद्र खोले गए हैं। 137 क्रय केंद्रों पर एक महीने के दौरान एक दाना धान नहीं खरीदा गया है। केवल 17 क्रय केंद्रों पर कुछ किसानों से धान खरीदकर खानापूर्ति की गई है। पीसीएफ, पीसीयू जैसी बड़ी क्रय एजेंसियों के क्रय केंद्रों पर खरीद नहीं की जा रही है, जबकि सबसे ज्यादा इन्हीं दो एजेंसियों पीसीएफ के 62, पीसीयू के 49 क्रय केंद्र खोले गए हैं। वहीं व्यापारियों व राइस मिलर्स द्वारा किसानों का धान औने-पौने दामों पर धड़ल्ले से खरीदा जा रहा है। नीलामी प्रक्रिया में मानकों का पालन तक नहीं किया जा रहा है। इससे किसानों की आमदनी बढ़ना तो दूर धान की लागत मिलना मुश्किल हो रहा है। राइस मिलर्स मंडी के बाहर ही ट्रालियों को अपनी मिलों पर बुलाकर तौल करा रहे हैं। मंडी शुल्क को चूना लगाया जा रहा है।
क्रय केंद्रों पर सन्नाटा रहने के प्रमुख कारणों में क्रय एजेंसियों की धान न खरीदने की मंशा के अलावा राइस मिलर्स द्वारा सीधे किसानों से की जा रही धान खरीद है, क्योकि पिछले वर्षों में सरकारी धान खरीद के समय राइस मिलर्स को सीधे अपनी मिल पर किसानों से धान खरीदने की अनुमति नहीं दी गई थी। सरकारी क्रय केंद्रों का धान कूटकर सीएमआर तैयार करने के लिए इन्हीं राइस मिलों को क्रय केंद्रों से संबद्ध किया गया है। इस कारण अफसरों की मंशा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। राइस मिलर्स द्वारा औने पौने दामों पर खरीदे जा रहे धान से तैयार चावल को सीएमआर के तौर पर खपाया जा सकता है। ताकि बाद में सरकारी खरीद को लक्ष्य के अनुरूप दिखाया जा सके।
लाखों कीमत से खरीदी ड्रायर मशीन पड़ी निष्प्रयोज्य
राजापुर मंडी में आने वाले किसानों के धान में नमी अधिक होने की दशा में उसे वहीं पर सुखाकर मानक के अनुरूप बनाने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए तीन साल पहले 10 लाख कीमत की ड्रायर मशीन खरीदी गई थी। क्रय केंद्रों पर धान बेचने के लिए अधिकतम 17 प्रतिशत तक नमी स्वीकार की जाती है। लिहाजा किसानों की सुविधा के लिए राजापुर मंडी परिसर में ही ड्रायर मशीन स्थापित की गई है, लेकिन अभी तक इस मशीन का उपयोग नहीं किया गया है। वहीं किसान अधिक नमी के कारण रिजेक्ट होने वाला धान औने-पौने दामों पर बेचने को विवश हैं।
‘पिछले वर्ष कृषि कानून लागू होने के कारण राइस मिलर्स पर कुछ प्रतिबंध लगाए गए थे, लेकिन अब कृषि कानून लागू नहीं है। इससे पुन: पुरानी व्यवस्था बहाल हो गई है। जिन राइस मिलर्स के पास धान खरीदने का लाइसेंस है, वो किसानों से धान खरीद सकते हैैं। हालांकि इसके लिए मंडी शुल्क अदा करना अनिवार्य है। यदि मंडी के बाहर खरीदे जा रहे धान पर मंडी शुल्क की चोरी की जा रही है, तो संबंधित मिलर्स के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।’ - संजय कुमार सिंह, एडीएम