तो राज्य पोषण मिशन भी साबित हो रहा बेअसर
सुधार के प्रयासों के बीच कम नहीं हो रही कुपोषित बच्चों की तादाद
पोषण पुनर्वास केंद्र पर बच्चों को भर्ती कराने में कोताही
38323 बच्चे अतिकुपोषित और 128676 बच्चे कुपोषण की गिरफ्त में
जीरो से पांच साल तक के बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए सरकार की ओर से चलाया गया राज्य पोषण मिशन अभियान की धार अब कुंद हो गई है, जिससे ग्रामीण इलाकों में अभियान एक फ्लॉप शो बनकर रह गया है। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार और स्वास्थ्य विभाग को संयुक्त रूप से इसकी जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन दोनों विभाग कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में लगातार पिछड़ते जा रहे हैं। वहीं गांवों को गोद लेने वाले अफसर भी शायद मिशन को भूल चुके हैं। नतीजतन अप्रैल 2016 मेें कराए गए आंगनबाड़ी सर्वे में जिले के 15 ब्लाकों में 38323 अतिकुपोषित (लाल श्रेणी) बच्चे चिह्नित किए गए हैं। जबकि कुपोषित (पीली श्रेणी) बच्चों की तादाद एक लाख 28 हजार 172 तक पहुंच गई है। अतिकुपोषित बच्चों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में स्थापित पोषण पुनर्वास केंद्र पर भी बच्चों को भर्ती कराने की संख्या बहुत कम ही हैै।
बता दें कि बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से प्रतिमाह आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों में कुपोषण की स्थिति की जांच कराई जाती है। साथ ही बच्चों को पोषाहार बांटा जाता है। इसके बावजूद बच्चों में कुपोषण की दर कम नहीं हो रही है। अप्रैल 2016 में हुई जांच के नतीजों पर गौर करें, तो मिशन की शुरुआत से स्थिति जस की तस बनी हुई है। 15 ब्लाकों में जीरो से पांच वर्ष तक के कुल पांच लाख 681 बच्चों के सापेक्ष चार लाख 77 हजार 923 बच्चों का विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक के अनुसार वजन किया गया तो इसमें 551 बच्चे अतिकुपोषित (लाल श्रेणी) पाए गए। जबकि 1690 बच्चे कुपोषित (पीली श्रेणी) पाए गए। जबकि मार्च 2016 तक 38427 बच्चे अतिकुपोषित और एक लाख 28 हजार 676 बच्चे कुपोषित थे। मार्च से अप्रैल तक 655 अतिकुपोषित बच्चों में सुधार आने के बाद पीली श्रेणी यानी कुपोषित में रखा गया। वहीं पीली श्रेणी के 120 कुपोषित बच्चे देखरेख और उचित पोषण के अभाव में अतिकुपोषण का शिकार हो गए हैं। डब्ल्यूएचओ के मानक के मुताबिक अतिकुपोषित बच्चों को शीघ्र ही इलाज और उचित पोषण की जरूरत होती है।
ऐसे होता है बच्चों की पहचान
सात माह से तीन वर्ष तक के बच्चों का प्रतिमाह वजन किया जाता हैै। तीन से छह वर्ष तक के बच्चों का तिमाही वजन लेकर जांच की जाती है। अति कुपोषित बच्चों का 15 दिन में वजन लिया जाता है। कुपोषित बच्चों के बारे में सूचना स्थानीय एएनएम और सीएचसी/पीएचसी को दी जाती है, जो बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराते हैं।
मिशन के तहत कुपोषित बच्चों में सुधार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिसका परिणाम भी सामने आया हैै। सितंबर 2015 में 51 हजार अतिकुपोषित बच्चे चिह्नित किए गए थे, जिनमें करीब 12 हजार बच्चों में सुधार आ चुका है। बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराने के लिए संबंधित कर्र्मचारियों और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं, जिसमें लापरवाही बरतने वाले कर्मचारी/अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति कर दी जाएगी।
-अखिलेंदु दुबे, जिला कार्यक्रम अधिकारी