जिले में तालाबों को चिह्नित करने में पांच तहसीलें फिसड्डी साबित हुईं हैं। कई महीने गुजरने के बाद भी इन तहसीलों से तालाबों की रिपोर्ट नहीं आई है। सिर्फ तीन तहसीलों मितौली, गोला और मोहम्मदी में 534 तालाब ही चिह्नित किए जा सके है। राजस्व कर्मियों की इस लापरवाही से मत्स्य पालन का समय भी धीरे-धीरे गुजरने लगा है।
शासन ने जिले में मत्स्य पालन के लिए वर्ष 2015-16 में 2651 हेक्टेयर तालाब उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इसके लिए राजस्व विभागों से तालाबों की रिपोर्ट मांगी गई है। इस सिलसिले में मितौली क्षेत्र के 35 गांवों में 194 तालाब चिह्नित किए गए हैं। जबकि मोहम्मदी के 47 गांवों में 131 तालाब और गोला के 89 गांवों में 309 तालाब चिह्नित किए जा चुके हैं। इस बाबत मत्स्य विभाग को इसकी रिपोर्ट भी दे दी गई है। मोहम्मदी में मत्स्य विभाग ने तालाबों के 10 साल के लिए पट्टा आवंटन का शिविर भी लगाया था। जिसमें 18 तालाबों के पट्टे किए जा चुके हैं। वहीं मितौली में 20 अगस्त को पट्टा आवंटन के लिए शिविर का आयोजन होना है। जिला मत्स्य अधिकारी अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि तालाबों को चिह्नित कर लेखपालों को रिपोर्ट सौंपनी है लेकिन लेखपाल तालाबों को चिह्नित करने में लापरवाही बरत रहे हैं। जिसकी वजह से लखीमपुर, निघासन, पलिया, धौरहरा और निघासन तहसील में अब तक मत्स्य पालन के लिए पट्टा आवंटन में देरी हो रही है। क्योंकि अगर जल्द तालाबों को चिह्नित नहीं किया गया तो इस सीजन में मत्स्य पालन में देरी का खामियाजा मत्स्य पालकों को भुगतना पड़ेगा।
20 अगस्त तक चुने जाने हैं प्रतिनिधि
पट्टा आवंटन की प्रक्रिया में मछुआ समुदाय की ओर से प्रतिनिधित्वि करने के लिए 20 अगस्त तक मत्स्य विभाग में आवेदन जमा किए जाएंगे। मत्स्य अधिकारी ने बताया कि प्रतिनिधि बनने के लिए इच्छुक व्यक्ति जल्द आवेदन जमा कर सकते हैं। गांवों में पट्टा आवंटन मछुआ समुदाय को किया जाएगा। अगर गांव में मछुआ समुदाय का कोई व्यक्ति नहीं है तो वहां अनुसूचित जाति को प्राथमिकता दी जाएगी।