लखीमपुर खीरी। जिले में अब तक सिर्फ 24 पुरुषों की ही नसबंदी हो पाई है, जबकि शासन से 40 का लक्ष्य निर्धारित है। वहीं 6000 के लक्ष्य में महज 900 महिलाओं ने नसबंदी कराई है। निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार से नसबंदी पखवाड़े की शुरूआत की है। जो दो चरणों में चार दिसंबर तक चलेगा। पहले चरण में पुरुषों को जागरूक किया जाएगा और दूसरे चरण में नसबंदी कराई जाएगी।
सीएमओ डॉ. संतोष गुप्ता ने बताया कि पुरुष नसबंदी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह महिला नसबंदी की अपेक्षा अधिक सुरक्षित है। उन्होंने बताया कि एनएसवी विधि से किए जाने वाली पुरुष नसबंदी में न तो चीरा लगता है, न टांका लगता है और न ही पुरुष में किसी प्रकार की कमी व कमजोरी आती है। ऑपरेशन के एक घंटे बाद आदमी घर जा सकता है और 72 घंटे बाद अपना कामकाज आम दिनों की तरह ही कर सकता है।
सीएमओ ने बताया कि परिवार नियोजन के लिए पुुरुषों को आगे आना चाहिए, क्योंकि इनकी शारीरिक संरचना महिलाओं की अपेक्षा अधिक सरल होती है। जिला प्रबंधक पद्माकर त्रिपाठी ने बताया कि ''''स्वस्थ मां, स्वस्थ बच्चा, जब पति का हो परिवार नियोजन में योगदान अच्छा'''' विषय पर इस बार अभियान चलाया जाएगा।
निर्धारित लक्ष्य
पुरूष- 40
नसंबदी हुई- 24
महिला- 6000
नसबंदी हुई- 912
पखवाड़े में होंगी यह गतिविधियां
परिवार नियोजन कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. प्रमोद वर्मा ने बताया कि पहल चरण में एएनएम, आशा पुरुष गर्भनिरोधक साधनों के प्रयोग के लिए इच्छुक दंपतियों की पहचान करेंगी। पुरुष नसबंदी के लिए पुरुषों को जागरूक करेंगी। इसके बाद दूसरे चरण में इनकी नसबंदी कराई जाएगी।
मिलती है प्रोत्साहन राशि
जिला प्रबंधक पद्माकर त्रिपाठी ने बताया कि नसबंदी करवाने वाले व्यक्ति की उम्र 60 साल से कम होनी चाहिए। नसबंदी कराने वाले पुरुषों को तीन हजार, प्रेरक को प्रति लाभार्थी 400 रुपये मिलते हैं। जबकि महिला को दो हजार और प्रेरक को 300 रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलती है।