देबीपुर गांव में हुई घटना के बाद जमा ग्रामीणों की भीड़। स्रोत : ग्रामीण।
बांकेगंज। गोला वन रेंज के बरौंछा नाला क्षेत्र में दो शावकों के साथ खेतों में डेरा जमाए बाघिन सोमवार रात ग्रंट नंबर 11 पंचायत के देबीपुर गांव आबादी में पहुंच गई, जहां किसान अशोक कुमार के घर में बंधी बकरी पर हमला कर उसे मार डाला। इसके बाद मुंह में दबोच कर गन्ने के खेत में चली गई।
बकरी और कुत्तों के चिल्लाने की आवाज पर जागे परिजनों को जब घर के अंदर बकरी नहीं दिखी, तब उन्हें इस बात की जानकारी हुई। उनके शोरगुल मचाने पर तमाम ग्रामीण वहां पहुंच गए और टॉर्च लेकर उसकी तलाश में निकले। उसे खदेड़ने के लिए पटाखे दगाए और शोरगुल मचाया, लेकिन वह टस से मस नहीं हुई। इस बीच गन्ने के खेत से बाघिन के रुक-रुक कर गुर्राने की आवाजें रात भर सुनाई देती रहीं, जिससे लोगों की नींद उड़ गई।
मंगलवार सुबह मौके पर पहुंची वन कर्मियों की टीम ने पगमार्क देखकर बाघिन की मौजूदगी की पुष्टि की है। हालांकि, टीम को उसका शव बरामद नहीं हो सका। वहीं, ग्रंट नंबर 11 की प्रधान रितु रंजना गौतम और ग्रामीणों का कहना है कि हमलावर बाघिन और उसके दो शावक पिछले पांच दिन से आबादी के पास प्रतापपुर, देबीपुर, कुंवरपुर आदि के गन्ने के खेतों में छिपी हुई है।
हमले के डर से वे लोग खेतों की ओर जाने से कतराने लगे हैं, जिससे उनकी खेती-बाड़ी चौपट है। इसको लेकर लोगों में वन विभाग के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
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आक्रोशित ग्रामीणों की वनकर्मियों से नोकझोंक
देबीपुर गांव में बकरी को मारने के बाद मंगलवार सुबह मौके पर पहुंची वन कर्मियाें की टीम और आक्रोशित ग्रामीणों की काफी देर तक नोकझोंक होती रही। पालतू पशुओं पर हमले से परेशान लोग बाघिन और उसके शावकों को पकड़ने की मांग पर अड़ गए। उनका कहना है कि विभाग न तो उसे पकड़ पा रहा है और न ही उनकी इस विकराल समस्या की ओर ध्यान दे रहा है। भीड़ में घिरी टीम ने ग्रामीणों को समझा-बुझाकर बमुश्किल शांत किया।