बाघिन की दहाड़ और पदचिह्न दिखने से ग्रामीणों में दहशत
बरौछा नाले के भदरकुंड इलाके में पिछले कई दिनों से बसेरा बनाए बाघिन और दो शावक बीती शाम भदरकुंड से बाहर किसानों के खेतों में घूमते हुए दिखे। बाघिन के दहाड़ने की आवाज और खेतों में पदचिह्न दिखने से ग्रामीणों में दहशत है। ग्रामीणों ने इसकी सूचना जटपुरा फारेेस्टर सुखपाल सिंह को दी। लोगों की सूचना पर पहुंचे फॉरेस्टर सुखपाल सिंह ने खेतों में बाघिन और शावक के पदचिह्न मिलने पर उसकी मौजूदगी की पुष्टि की है।
मालूम हो कि दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मैलानी रेंज की जटपुरा बीट जंगल से सटे बरौंछा नाले के भदरकुंड के आसपास एक बाघिन अपने दो शावकों के साथ पिछले 15 दिनों से मौजूद है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तकरीबन हर दिन बाघिन और शावक भदरकुंड के आसपास लंबी झाड़ियों से निकलकर बच्चों के साथ अठखेलियां करते नजर आ रही है। किसान अनवर अली, कमलेश कुमार, इरफान अली, साधू सिंह, लोकराम, मोहम्मद जाबिर आदि ने बताया कि वे सोमवार शाम करीब चार बजे भदरकुंड इलाके से सटे खेतों में धान फसल रोपाई की तैयारियों के लिए घास-फूस की सफाई कर रहे थे। इस दौरान भदरकुंड की लंबी झाड़ियों से शावकों संग बाघिन को निकलता देख उनके होश उड़ गए। उनके शोर मचाने पर बाघिन शावकों संग चहलकदमी करती हुई खेतों की ओर चली गई। दहशतजदा किसानों ने बताया कि बाघिन और शावकों के दूर निकल जाने पर सब लोग वहां से भाग लिए। बाघिन और शावकों ने अभी तक किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया है। बावजूद इसके भदरकुंड इलाके में बाघिन और शावकों की मौजूदगी के चलते उनका खेतों में जाना दूभर हो गया है।
उधर, रेंजर मैलानी डीएस यादव का इस बाबत कहना है कि बरौछा नाले के भदरकुंड इलाके में शावकों संग बाघिन की मौजूदगी की सूचना मिल रही है। वनकर्मी बाघिन और शावकों की लगातार निगरानी कर रहे है। वन्यजीव अकारण हमलावर नहीं होते, उन्हें अपना दुश्मन नहीं दोस्त समझें। रेंजर ने ग्रामीणों से सतर्कता बरतने की बात कही है। साथ ही लोगों से भदरकुंड इलाके में न जाने की अपील की है।