बंशी बेली गांव में खाली पड़ा पिंजरा। संवाद
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धौरहरा (लखीमपुर खीरी)। आतंक का पर्याय बना तेंदुआ मंगलवार को वन विभाग की टीम को गच्चा दे गया। वह बंशी बेली गांव के पास लगाए गए पिंजरे में बंधी बकरी लेकर चला गया, जबकि वन कर्मियों को भनक तक नहीं लगी।
वनरेंज के गांव चकदहा और साहबदीन पुरवा गांव में दो बच्चों को मारने वाले तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग भरसक प्रयास कर रहा है, लेकिन तेंदुआ लगातार जगह बदल रहा है। तेंदुओं के लिए मुफीद मानी जाने वाली घाघरा नदी की तलहटी में वह चहलकदमी कर रहा है। इसकी पुष्टि उसके पगचिह्नों से भी हो रही है।। वन विभाग ने तेंदुए के पगचिह्नों के सहारे उसकी टोह लेनी शुरू की। जहां तक पगचिह्न मिले, वन विभाग की टीम ने निशानदेही की। वन क्षेत्राधिकारी अनिल शाह ने बहराइच के मुर्तिहा वनरेंज से एक और पिंजरा मंगाया, उसे बंशी बेली गांव के पास लगाया। उसमें एक बकरी बांध दी। मंगलवार की रात वन कर्मियों को गच्चा देकर तेंदुआ पिंजरे में बंधी बकरी उठा ले गया। इस घटना से वन विभाग को उम्मीद बंधी है कि तेंदुआ पिंजरे में फिर आएगा, इसको लेकर वनकर्मियों को अलर्ट कर दिया गया है। पिंजरे में फिर एक बकरी बांधी गयी है।
वन क्षेत्राधिकारी अनिल शाह ने बताया कि तेंदुआ पिंजरे से बकरी निकाल कर ले गया है। इससे उम्मीद है कि वह फिर आएगा। उम्मीद है कि इस बार वह पकड़ा जाएगा। वन कर्मियों से अलर्ट रहने के लिए कहा गया है।