सात दिनों से क्षेत्र में आंतक मचा रहा बाघ आखिरकार तकिया जंगल चला गया। बाघ के जंगल की ओर लौटने के पगमार्क मिलने की पुष्टि वन विभाग के अधिकारियों ने की है। इससे क्षेत्रवासियों ने राहत की सांस ली है। वन विभाग ने ग्रामीणों को एहतियातन सावधानी बरतने की सलाह दी है।
मालूम हो कि 11 फरवरी को गजियापुर क्षेत्र में बाघ ने एक गाय को निवाला बनाया था। दो दिनों तक क्षेत्र में रहने के बाद बाघ गन्ने के खेत से होता हुआ टांडा गांव पहुंचा। वहां भी एक बैल को अपना निशाना बनाया, लेकिन ग्रामीणों के शोर मचाने पर वह गन्ने के खेत में जा छिपा। उसके बाद बाघ नौरंगाबाद में देखा गया। बाघ को पकड़ने के लिए पिंजरे की व्यवस्था की गई, लेकिन बाघ वन विभाग के हत्थे नहीं चढ़ा। शुक्रवार को बाघ को खदेड़ने के लिए जेसीबी का भी इस्तेमाल किया गया लेकि न बाघ एक गन्ने के खेत से होता हुआ दूसरे गन्ने के खेत में छिप गया। शाम होने के कारण टीम वापस लौट आई। बेलरायां रेंज के रेंजर एमएन सिंह ने बताया कि शनिवार सुबह जब बाघ को तलाशने के लिए तोता सिंह के गन्ने के खेत की घेेराबंदी की गई तो उसमें बाघ की आहट नहीं सुनाई पड़ी। जिसके बाद बाघ के पगमार्क फरदहिया से अइली गांव की ओर गए थे। उन्हीं के सहारे टीम तकिया जंगल की ओर पहुंची। टीम का दावा है कि बाघ तकिया जंगल में चला गया है।