अप्रैल में ही सूख गए जंगल के नदी, नाले, और जलस्त्रोत
जंगल के बाहर इंसानों और जानवरों में बढ़ रहा टकराव
कड़ी धूप और भीषण गर्मी के चलते इस साल अप्रैल में जंगल के नदी, नाले, तालाब और पोखर सूख गए हैं। जंगली जानवरों के लिए पीने के पानी का संकट पैदा हो गया है। बाघ, तेंदुआ जैसे हिंसक जानवरों के अलावा हिरन आदि जंगली जानवर अपनी प्यास बुझाने के लिए जंगल से निकलकर आबादी वाले इलाकों में आ रहे हैं। इससे इंसानों और बाघों के बीच एक बार संघर्ष की स्थिति पैदा हो रही है। पिछले तीन माह के अंदर बाघ के हमले में चार लोगों की मौत से लोग दहशत में हैं।
आम तौर से बाघ और दूसरे जंगली जानवर सर्दियों के मौसम में उस समय जंगल से बाहर आते हैं जब जंगल से सटे खेतों में गन्ने की फसल खड़ी होती है। बाघ इसे जंगल का ही एक हिस्सा समझकर इन खेतों में आ जाते हैं। यहां इन्हें नीलगाय और हिरनों के रूप में पर्याप्त भोजन भी मिलता है। गर्मियों के मौसम में यह जानवर तभी निकलते हैं जब जंगल में पानी की कमी हो।
जंगल के अंदर से निकले नदी नाले और दूसरे जलस्त्रोत इस बार पड़ रही भीषण गर्मी के कारण जल्दी सूख गए हैं। इससे जंगली जानवरों के सामने पानी का संकट पैदा हो गया है। जंगली जानवर अपनी प्यास बुझाने के लिए जंगल से बाहर निकलकर आबादी क्षेत्र में आ रहे हैं। इससे ग्रमीणों के साथ-साथ वन विभाग की भी मुसीबत बढ़ गई है। हालांकि वन विभाग जंगल में पानी की कमी की बात से इनकार कर रहा है। वनाधिकारियों का कहना है कि जंगल में बढ़ती इंसानी दखलंदाजी के कारण जंगली जानवर जंगल से बाहर निकल रहे हैं।
तीन माह में बाघ के हमले में चार मौतें
=12मार्च 2016-जंगल से निकले बाघ ने कुकरा निवासी रईस को हमला कर मार डाला।
=18 मार्च 2016-खेत की रखवाली कर रहे सुनेहरा भूड़ के किसान तरसेम सिंह को बाघ ने घायल किया, मौत।
=16 अप्रैल 2016-मैलानी क्षेत्र में गांव ढाका की 19 वर्षीय किरन को बाघ ने हमला कर मार डाला।
=18 अप्रैल 2016-सोनारीपुर रेंज के विहारीपुरवा गांव निवासी 50 वर्षीया अंजनी को बाघिन ने निवाला बनाया।
जंगल में पानी की कमी खतरे की घंटी
जंगल के जलस्त्रोतों का सूखना जंगली जानवरों के लिए ही नहीं इंसानों के लिए भी खतरे की घंटी है। जब जंगली जानवर पानी के लिए जंगल से बाहर निकलेंगे तो इंसानों और जानवरों दोनों के लिए खतरा बढ़ेगा।
-डॉ. वीपी सिंह,
पूर्व सदस्य-राज्य वन्यजीव सलाहकार परिषद उत्तर प्रदेश
जंगल में पानी की कमी नहीं होने दी जाएगी
जंगल में अभी इतनी पानी की कमी नहीं है। जल्दी ही जंगल के तालाब और पोखरों में ट्यूबवेल के जरिए पानी भरवाया जाएगा। वैसे जंगली जानवरों के बाहर निकलने का मूल कारण जंगल में बढ़ती इंसानी दखलंदाजी है।
-नीरज कुमार, डीएफओ साउथ खीरी।