बाघ के कदमों के निशानों का पीछा कर वन विभाग की टीम उसे जंगल तक छोड़ आई। विभाग का दावा है कि गुरुवार को मिले पगमार्क जंगल तक गए हैं। बस्तौला साइफन से पगमार्कों का पीछा करती हुई टीम डिमरौल, सेमरिया होकर बहादुरनगर के जंगल तक पहुंच गई और लोगों को यकीन दिलाया कि इसी जगह से बाघ जंगल में वापस हो गए। वहीं डिमरौल गांव के दक्षिण-पूरब में बाघ की लोकेशन गन्ने के खेत में मिलने से सैकड़ों ग्रामीण खेत को घेरे खड़े रहे।
गुरुवार को एक बार फिर से टीम कैप्टन वासवी प्रकाश ट्रेनी आईएफएस और उनके नायब आरपी सिंह एसडीओ गोला के नेतृत्व में बिजुआ पहुंची। यहां पर अधिकारियों ने बस्तौला साइफन के पास से बाघ के पगमार्कों का निरीक्षण किया। उनके साथ टीम में शामिल फारेस्टर एसएस चौहान, नागेंद्र पांडेय, वनरक्षक ब्रजेश कुमार समेत करीब दर्जन भर लोग शामिल थे। विभाग को गुरुवार को जो बाघ के पगमार्क मिले हैं, उनके मुताबिक तीन बाघ हो सकते हैं, जिनमें दो शावक और एक बाघिन की उम्मीद जताई जा रही है। टीम के मुताबिक बाघ के ताजे पगमार्क डिमरौल के पूरब से होकर सेमरिया, बहादुरनगर होते हुए जंगल तक गए हैं।
असलहे लेकर पहुंचे ग्रामीण
बिजुआ। वन महकमे की टीम एक तरफ जंगल तक बाघ के पगमार्क ढूंढ रही थी दूसरी तरफ डिमरौल के दक्षिण-पूरब में बाघ देखे जाने का हल्ला मच गया। देखते ही देखते दर्जनों ग्रामीण अपने लाइसेंसी असलहे लेकर गन्ने के खेत को घेरने पहुंच गए। सूचना पर महकमे के लोग भी वहां पहुंचे और ग्रामीणों को समझाबुझाकर वापस किया।
....काश सच साबित हो विभाग का दावा
बाघ के जंगल वापसी का दावा कितना पक्का है, इस बात की तस्दीक एक दो दिन में हो जाएगी। आए दिन बाघ के देखे जाने और पगमार्क मिलने की सूचनाएं आती रहती हैं।