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बाघ संरक्षण के प्रयासों को परखा

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बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के सदस्य सचिव डॉ अनूप नायक दो दिवसीय दौरे पर दुधवा टाइगर रिजर्व पहुंचे। यहां उन्होंने बाघ संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का जायजा लिया। ग्रासलैंड और वेटलैंड मैनेजमेंट के साथ-साथ सुरक्षा उपायों की भी जानकारी ली। उन्होंने बाघ संरक्षण और संवर्धन के लिए टाइगर रिजर्व में किए जा रहे प्रयासों पर संतोष जताया।
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डॉ अनूप नायक ने दुधवा टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की निगरानी के लिए बनाए गए वॉच टावर्स और मचानों का बारीकी से जायजा लिया। एम स्ट्राइप्स पेट्रोलिंग के साथ ही स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स (एसटीपीएफ) और वनाधिकारियों के बीच समन्वय की भी समीक्षा की। बाघों, तेंदुओं और शावकों के सुरक्षा उपायों पर फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक समेत डिप्टी डायरेक्टर मनोज सोनकर, दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन के उपनिदेशक डॉ अनिल कुमार पटेल से वार्ता कर सुरक्षा प्रबंधों को पुख्ता करने के साथ ही नेपाल के साथ अंतरराष्ट्रीय समन्वय की भी बात कही। शुक्रवार दोपहर बाद डॉ नायक किशनपुर सेंक्चुरी पहुंचे। उन्होंने यहां के ग्रासलैंड और वेटलैंड मैनेजमेंट को देखकर उसकी सराहना की। साथ ही झादी ताल में सैकड़ों की संख्या में कलरव करते रंग-बिरंगे प्रवासी पक्षियों की संख्या को देख वनाधिकारियों से इनके संरक्षण और संवर्धन पर विशेष ध्यान देने की बात कही।
उन्होंने घास के मैदानों और वेटलैंड का भी निरीक्षण किया। इसके अलावा उन्होंने जंगल के अंदर बाघों की प्यास बुझाने के लिए जगह-जगह बनाए वॉटर होल्स को भी देखा। गश्त के लिए बनाईं गईं सड़कों और वन चौकियों का भी बारीकी से मुआयना किया। किशनपुर सेंक्चुरी में बाघों की साइटिंग वाले स्थलों को देखकर अफसरों को कड़ी निगरानी के निर्देश दिए। साथ ही बाघ संरक्षण के लिए एनटीसीए द्वारा दी जा रही धनराशि का उपयोग सही मदों में हो रहा है या नहीं इसकी भी जानकारी ली। एनटीसीए के सदस्य सचिव ने बताया कि दुधवा टाइगर रिजर्व बाघ संरक्षण और संवर्धन के लिए काफी अच्छा हैबिटेट है। कहा कि बाघों की संख्या भी संतोषजनक ढंग से बढ़ रही है यह एक अच्छा संकेत है।
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