ममरी (लखीमपुर खीरी)। मोहम्मदी रेंज क्षेत्र में गन्ने के खेतों में घूम रहे बाघों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि लोगों का घर से निकलना मुश्किल है। शनिवार की शाम अलग-अलग मामलों में बाइक सवार समेत दो लोगों के बाघ देखकर होश उड़े गए।
महेशपुर, देवीपुर, सजनिया बीट के जंगल के करीब बसे गांव पर्वस्तनगर, बरखेड़ा, मौठीखेड़ा, सुंदरपुर, रायपुर, गंगापुर, अयोध्यापुर, मुल्लापुर, सिंगहा, मोतीपुर, रामदीनपुर, त्रिलोकपुर, महेशपुर, नयागांव, बिहारीपुर, तूलमेलगंज के लोगों का कहना है कि दो बाघ शिकार की तलाश में बाहर आए हैं। जो एक महीने में दर्जनों पशुओं को निवाला बना चुके हैं। वनकर्मियों, एसटीपीएफ जवानों द्वारा पटाखे दागने, कांबिंग करने के बावजूद बाघ गन्ना के खेत छोड़ने को तैयार नहीं हैं, जिससे बाघ प्रभावित क्षेत्रों में दहशत कम होने का नाम नहीं ले रही है। यहां तक कि ग्रामीण खेतों की ओर जाने, गन्ने की छिलाई करने से घबरा रहे हैं। शनिवार सुबह 8:30 बजे महेशपुर से वापस घर जा रहा गांव रामदीनपुर निवासी युवक विशाल रोड के किनारे लघुशंका करने लगा इसी बीच गन्ने से निकला बाघ रोड पार करता हुआ दक्षिण दिशा को चला गया। जिसे देख युवक के होश उड़ गए। शोर मचाने पर महेशपुर, रामदीनपुर के तमाम लोग इकट्ठा हो गए, जिनके शोर मचाने पर बाघ खेत में घुस गया, इस बात की पुष्टि वन कर्मियों ने भी की है। उधर शनिवार की शाम चार बजे बाइक से बच्चों को लेने संसारपुर स्कूल जा रहे इटौवा निवासी राजपाल के अनुसार उनकी बाइक जैसे ही गंगापुर के उत्तर पहुंची वैसे ही गन्ने में छिपा बाघ बाइक के सामने आ गया, जिसे देख उसके होश उड़ गए। उसने बाइक दौड़ाकर अपनी जान बचाई। सूचना पर पहुंचे फॉरेस्टर रामप्रसाद, एसटीएफ जवानों ने भी वहां बाघ मौजूद होने की पुष्टि की। बताया कि बाघ से बचने के लिए रास्ते में अलाव जलवा दिए हैं, क्योंकि बाघ आग से डरता है। रेंजर मोबीन आरिफ का कहना है कि वनकर्मियों, एसटीपीएफ जवानों से बाघ प्रभावित क्षेत्र में रोजाना कांबिंग कराई जा रही है, फिर भी बाघ खेत नहीं छोड़ रहे हैं उन्होंने लोगों से सतर्क रहने, गन्ने की छिलाई सावधानी से समूह बनाकर करने को कहा है।