बाघ पकड़े जाने की मांग
उधर, सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजने का प्रयास किया तो परिजन भड़क गए। कहा कि जब तक बाघ नहीं पकड़ा जाता, वह शव का पोस्टमार्टम नहीं कराएंगे। मुआवजे की मांग भी की। ग्रामीणों ने बताया कि एक सप्ताह पूर्व भी गांव के आसपास बाघ की चहलकदमी की सूचना वन विभाग को दी गई थी।
ग्रामीण, वन विभाग की कार्यशैली से काफी नाराज थे। परिजन शाम पांच बजे तक मृतक का शव घटनास्थल के पास ही रखे रहे। रेंजर नरेश पाल सिंह ने बताया कि ड्रोन से लोकेशन पता की जा रही है। पगचिह्न देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है कि बाघ है या तेंदुआ।
एसडीएम ने किया मौके का निरीक्षण
पंचायती राज समिति के सभापति लोकेंद्र प्रताप सिंह घटनास्थल पर पहुंचे और रेंजर से बाघ को शीघ्र पकड़ने की बात कही। एसडीएम डॉ. अवनीश कुमार ने मौके का निरीक्षण किया। मृतक के भतीजे कमल ने पुलिस को सूचना दी। लेखपाल को सहायता राशि की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया।
दक्षिण खीरी के डीएफओ संजय विश्वाल ने बताया कि कॉम्बिंग के दौरान मिले पगचन्हि से क्षेत्र में तेंदुआ की मौजूदगी की संभावना जताई जा रही है। शव के पोस्टमार्टम से मृत्यु के कारणों की पहचान की जा सकेगी। घटनास्थल बेलापहाड़ां आरक्षित वन से लगभग एक किमी की दूरी पर है। निगरानी कराई जा रही है। ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है।
'बाघ को पकड़ें, पीड़ित परिवार को मिले 20 लाख का मुआवजा'
भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने घटनास्थल पर ही एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर बाघ को पकड़े जाने की मांग की। कहा कि मृतक के परिवार को 20 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। आश्रितों को दुर्घटना बीमा, प्रधानमंत्री आवास, आवासीय भूमि, न्यायिक एसडीएम के यहां न्यायिक कोर्ट में चल रहा आवास भूमि पर न्यायिक विवाद खारिज करने की मांग भी की। ज्ञापन देने वालों में सपा नेता क्रांति कुमार सिंह, किसान यूनियन के जिला महामंत्री शिवेन्द्र यादव, वन विभाग के रेंजर नरेश पाल सिंह, क्राइम इंस्पेक्टर आरके तिवारी आदि शामिल रहे।