लखीमपुर खीरी। नाबालिग को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने और उससे दुष्कर्म के मामले में अपर जिला जज हेमेंद्र कुमार सिंह ने तीन सगे भाइयों को आठ-आठ साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही तीनों आरोपियों पर 20-20 हजार रुपया का जुर्माना भी लगाया है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए शासकीय अधिवक्ता रमन सैनी ने बताया कि फूलबेहड़ थाना क्षेत्र के ग्राम सुंदरवल निवासी अलीम, कलीम और कयूम ने प्रधान थाना क्षेत्र के गांव में रहने वाली 14 वर्षीय किशोरी को 29 मार्च 2010 की सुबह बहलाकर भगा ले गए थे। मामले की रिपोर्ट दर्ज करने के बाद 11 अप्रैल 2010 को मल जवानों के कब्जे से पीड़िता को बरामद किया गया और किशोरी के कलम बंद बयान अदालत में दर्ज कराए गए।
अदालती सुनवाई के दौरान मजनू शाह और पीड़िता किशोरी के साथ ही डॉ. मीनाक्षी चौधरी, डॉ. अरुण कुमार, कांस्टेबल संतोष मिश्रा, इंस्पेक्टर संत कुमार दुबे की गवाही अदालत में कराई गई। अदालत ने शुक्रवार को अपना फैसला सुनाते हुए अलीम, कलीम और कयूम को किशोरी से दुष्कर्म के मामले में दोष सिद्ध पाया है, जिन्हें आठ-आठ वर्ष के कठोर कारावास और 20-20 हजार रुपया जुर्माना की सजा सुनाई गई है, साथ ही अदालत ने अपने फैसले में यह व्यवस्था दी है कि वसूल किए गए जुर्माने की रकम में आधी रकम मुआवजे के तौर पर पीड़ित किशोरी को दी जाएगी।
नेपाली तस्कर को दस वर्ष की जेल और एक लाख जुर्माना
लखीमपुर खीरी। नेपाल से भारत में तस्करी कर चरस लाने के मामले में अपर जिला जज हरिप्रसाद ने नेपाली युवक को दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही आरोपी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए अपर जिला शासकीय अधिवक्ता रमेश चंद्र मिश्रा ने बताया कि भारतीय नेपाल सीमा के पिलर संख्या 200 के करीब 23 अगस्त 2014 को एसएसबी आजाद नगर और पुलिस की संयुक्त टीम ने पिलर संख्या 200 के पास तलाशी और चेकिंग अभियान चलाया था, जिसमें एक मोटरसाइकिल से आते समय बसही बाजार के पास नेपाली युवक विशाल लामा तमांग को गिरफ्तार किया गया था।
आरोपी के पास से सात किलो चरस के साथ एक मोबाइल और 2160 नेपाली रुपये, नेपाली पासपोर्ट सहित कई आपत्तिजनक वस्तुएं बरामद हुई थीं। मामले में एसएसबी आजाद नगर की तहरीर पर संपूर्णानगर थाने में मामला दर्ज किया गया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान कांस्टेबल विनोद यादव, रामसागर राकेश और एसआई कैलाश नाथ की गवाही दर्ज कराई गई थी। पैरोकार अनिल कुमार ने पुलिस प्रपत्र को साबित किया। न्यायाधीश हरिप्रसाद ने मुकदमे की सुनवाई के बाद आरोपी विशाल लामा तमांग को दोषी पाते हुए दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही उस पर एक लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है।