धौरहरा। रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित समारोह शृंखला के अंतिम कार्यक्रम प्रादेशिक कवि सम्मेलन में शनिवार रात कवियों ने समां बांधा। बाराबंकी के डॉ. ओम शर्मा ओम ने ‘ये बेटियां हैं, खेल का सामान नहीं हैं’ गीत के जरिये बेटियों की पीड़ा को शब्दों में पिरोया। उनकी प्रस्तुति ने श्रोताओं को भावुक कर दिया।
कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे बाराबंकी के रामकिशोर तिवारी ने शहीद भगत सिंह के जीवन पर कविता सुनाई। लखनऊ के योगेंद्र योगी ने ‘एक लड़की साथ चलने के लिए तैयार है’ और अयोध्या की कल्पना तिवारी ने ‘मौन अधरों की मेरे तुम भाषा बनो’ रचना सुनाई।
धौरहरा के शोभित तिवारी ने ‘अलग हैं जातियां सबकी मगर परिवार है भारत’ कविता से राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया। लखीमपुर के शशिकांत तिवारी ने अपनी रचना से श्रोताओं का मन मोहा। लखनऊ के हास्य कवि अंकुर पाठक ने अपनी हास्य रचनाओं से खूब हंसाया। सम्मेलन का संयोजन स्थानीय कवि जगदीश पांडेय ने किया।
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‘तेरी जोगन बनी मैं दीवानी बनी’ गीत ने जीता दिल
पलियाकलां। रामलीला मैदान में दशहरा मेले के तहत शनिवार रात आयोजित प्रादेशिक कवि सम्मेलन में बलरामपुर से आईं गीतकार रिचा मिश्रा की प्रस्तुति प्रमुख आकर्षण रही। उन्होंने ‘तेरी जोगन बनी मैं दीवानी बनी, मां यशोदा के घर की मथानी बनी, प्रेम की अद्भुत कहानी बनी’ गीत सुनाकर श्रोताओं की तालियां बटोरीं। जनपद के ‘रसखान’ कहे जाने वाले कवि फारूक सरल की स्मृति में रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित सम्मेलन में देर रात तक काव्य पाठ चलता रहा।
नगर के चिकित्सक और ओज के कवि डॉ. सुखराज सिंह ने भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, रामप्रसाद बिस्मिल और सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को याद करते हुए भारत की शक्ति, स्वाभिमान और गौरव का वर्णन किया। कवि नदीम नाजिम ने ‘दमदमे में दम नहीं कि झुका दे ताकत हिंदुस्तान की’ पंक्तियों से देशभक्ति का जोश भरा। प्रदीप महाजन ने हास्य रचनाओं से श्रोताओं को गुदगुदाया, जबकि अतुल मधुकर ने गीतों से समां बांधा।
लखीमपुर के इंद्रपाल वर्मा, बहराइच के देशराज ‘मधुसूदन’, बाराबंकी के प्रदीप महाजन, सीतापुर के अतुल मधुकर, लखीमपुर के नदीम नाजिम और संदीप कटिहार ने भी काव्य पाठ किया। स्थानीय कवि ठाकुर अंकुर सिंह, नफीस, त्रिभुवन नाथ मिश्रा, सचिन रस्तोगी, एहतशाम और नीरज ने अपनी रचनाएं सुनाईं। संवाद