स्वास्थ्य विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की हड़ताल सोमवार को भी 12.00 बजे तक रही। इस दौरान इलाज कराने आए तमाम मरीजों को बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ा। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की हड़ताल से अस्पताल में अव्यवस्थाएं भी रहीं और कई जगह गंदगी भी रही। हालांकि दोपहर में सीएमओ से वार्ता के बाद कर्मचारियों ने हड़ताल समाप्त कर दी।
बताते चलें कि महिला अस्पताल की सीएमएस के व्यवहार से असंतुष्ट स्वास्थ्य विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने 22 अगस्त को सीएमओ कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया था। यहां कर्मचारियों ने मांगे न माने जाने पर हड़ताल का ऐलान किया था। रविवार तक कर्मचारियों की मांगों पर विचार न होने से आक्रोशित कर्मचारियों ने सोमवार को हड़ताल शुरू कर दी। हड़ताल के बाद कर्मचारियों ने जहां पर्चा बनने वाला काउंटर बंद कर दिया वहीं अस्पताल की सफाई भी नहीं की। इससे अस्पताल में गंदगी हो गई। हालांकि दस बजे सीएमओ ने कर्मचारियों को तथा महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. मीरा वर्मा को बुलाया और दोनों पक्षों में समझौता करा दिया। इसके बाद कर्मचारियों ने हड़ताल समाप्त कर दी। कर्मचारियों की हड़ताल के चलते अस्पताल में काफी अव्यवस्थाएं रहीं।
पर्चे बनवाने को घंटो बैठे रहे मरीज
लखीमपुर खीरी। जिला अस्पताल में दूरदराज से आए तमाम मरीज पर्चा न बनने से इधर-उधर भटकते रहे। तमाम मरीज बिना इलाज के ही वापस चले गए जो नहीं गए उन्हें भी दोपहर तक पर्चे बनवाने के लिए बैठना पड़ा।
पर्चा नहीं बनने से नहीं मिली दवा
ग्राम पड़रिया कलां से आई जावित्री देवी ने बताया के सिर में चोट थी वे सुबह 8.00 बजे ही आ गई थीं लेकिन पर्चा न बनने से वे डाक्टर को नहीं दिखा पाईं। बिना इलाज के ही लौटना पड़ा।
श्यामपती को नहीं मिल पाई दवा
गांव मदन ढखिया निवासी श्यामपती ने बताया कि वे श्वांस और सरदर्द की बीमारी से पीड़ित हैं। वे भी सुबह लगभग 8.30 बजे ही आ गई थीं लेकिन पर्चा न बनने के कारण लगभग एक बजे तक बैठना पड़ा।
चार घंटे बैठे रहे अनिल
मुरथना जिला सीतापुर से आए अनिल ने बताया से श्वांस की बीमारी से पीड़ित हैं। सुबह नौ बजे ही अस्पताल आ गए थे लेकिन पर्चा नहीं बनने से करीब चार घंटे तक बैठे रहे।
कुत्ते काटे मरीजों को नहीं लगा इंजेक्शन
कुत्ता काटने का इलाज कराने आए ग्राम बालूडिहा निवासी अंकित और सर्वेश के परिवार वालों ने बताया उनके बच्चों को कुत्तों ने काटा है। सुबह से पर्चे के लिए बैठे हैं पर्चा नहीं बना इसलिए एक बजे तक बैठना पड़ा।