लखीमपुर खीरी। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में ड्यूटी निभा रहे बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) की मुसीबतें कम नहीं हो रही हैं। अधिकांश बीएलओ को अब तक मानदेय नहीं मिला। काम का बोझ इतना अधिक है कि उनको छुट्टी के दिन भी काम करना पड़ता है। रविवार को भी बूथ पर ड्यूटी निभानी पड़ रही है, जिसका उनको प्रतिकर अवकाश भी नहीं दिया गया।
एसआईआर का काम निपटाने के बाद अब बीएलओ के पास बड़ी जिम्मेदारी नोटिस निस्तारण का है। पहले घर-घर नोटिस देने व मतदाताओं को दस्तावेजों के साथ तहसील तक बुलाने की जिम्मेदारी भी बीएलओ के कंधों पर है। सदर विधानसभा सदर की बीएलओ मौसमी गुप्ता ने बताया कि एसआईआर के लिए दिन रात माथापच्ची करनी पड़ रही है।
वर्ष 2003 की सूची में कुछ मतदाता की डिटेल मैच न होने से मैपिंग में दिक्कतें ज्यादा आ रही हैं। नोटिस मिलने पर मतदाता अपने दस्तावेज तो ला रहे हैं। सख्त ड्यूटी होने के बावजूद अब तक न तो मानदेय मिला है और न ही प्रतिकर अवकाश दिया गया। विधानसभा श्रीनगर के बीएलओ आरती ने बताया कि काम का बोझ तो बढ़ता जा रहा है लेकिन न मानदेय मिल रहा है और न ही प्रतिकर अवकाश। जिले में तीन हजार से अधिक बीएलओ काम कर रहे हैं।
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बूथों पर नजर नहीं आ रहे पदाभिहित अधिकारी
एसआईआर में आयोग ने दावे और आपत्तियां प्राप्त करने की अवधि छह फरवरी है। 17, 18 और 31 जनवरी के साथ ही दो फरवरी को विशेष बूथ का आयोजन की तिथि है। आयोग ने इन विशेष अभियान दिवसों के लिए बूथों पर बीएलओ के साथ पदाभिहित अधिकारी की ड्यूटी अनिवार्य की गई है। बावजूद अधिकतर बूथों पर अधिकारी नजर नहीं आ रहे। ऐसे में दावे और आपत्तियां के निस्तारण में एसआईआर का काम गति नहीं पकड़ पा रहा है।
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दस्तावेज नहीं उठा पा रहे लोग
-एसआईआर में 2.48 लाख मतदाता नो मैपिंग में आए हैं, जिनको नोटिस जारी किया गया है। नोटिस मिलने के सात दिन के अंदर तय तिथि पर दस्तावेजों के साथ तहसील पहुंचना होता है। नोटिस निस्तारण के लिए 210 अधिकारी नामित किए गए हैं। प्रत्येक अधिकारी को एक दिन में 150 नोटिसों का निस्तारण का लक्ष्य है लेकिन पहुंचते मात्र 70 से 80 लोग हैं। काफी लोग तो आते ही नहीं। जो आ भी रहे हैं, उसमें भी कुछ लोग दस्तावेज नहीं दे पाते हैं।
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सभी बीएलओ को दिसंबर तक का मानदेय भेजा जा चुका है। एसआईआर का काम महत्वपूर्ण है। इसी वजह से अवकाश अभी तो किसी को भी नहीं मिल पा रहा है।
-नरेंद्र बहादुर सिंह, एडीएम