गोला गोकर्णनाथ। स्वामी विवेकानंद बाल उद्यान में चल रही श्रीराम कथा के पांचवें दिन व्यास अजयानंद महाराज ने भ्रात प्रेम के उत्कृष्ट उदाहरण श्रीराम और भरत के चित्रकूट में मिलने की कथा सुनाई।
व्यास ने कहा कि भरत नंगे पैर राज-समाज के साथ श्रीराम को मनाने जा रहे हैं। कंटकों से युक्त मार्ग भी उन्हें विचलित नहीं कर पा रहे हैं। क्योंकि भरत भक्ति के पर्याय और धर्म स्वरूप हैं, वह भक्ति के पुंज हैं। भरत त्याग की प्रतिमूर्ति है। भगवान श्री राम ने अपने अनुज भारत की प्रशंसा करते हुए कहा भरत के मन में तो राम बसे हुए हैं और राम के मन में भरत। जब राम जी से भरत मिले तो श्रीराम ने कहा कि भरत पिता के न होने पर संपत्ति तो सभी भाई बांट लेते हैं परंतु विपत्ति को जो बांटे वही भाई होता है। इतिहास में सृष्टि के प्रारंभ से अब तक त्याग का भरत जैसा उदाहरण नहीं मिलता है। इस मौके पर शशिकांत मिश्र, कन्हैया लाल शुक्ल, दुर्गाप्रसाद मिश्र, राजेश्वर शुक्ल, राकेश सिंह, राकेश शुक्ल, शशिबाला राबड़ा, वेद प्रकाश अग्निहोत्री और रामदेव आदि उपस्थित रहे।