निघासन। तहसील मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर सरयू नदी के मांझा घाट पर पक्का पुल न बनने से लोग परेशान हैं। इस मार्ग पर लोग काफी समय से पुल की मांग करते आ रहे हैं, बावजूद इसके संबंधित अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया।
मांझा घाट पर बनाए गए लकड़ी के अस्थायी पुल से रोजाना सैकड़ों लोग गुजरते हैं। लकड़ी की बल्लियों पर पटरों के सहारे से बना पुल इस कदर जर्जर है कि कभी भी गिर सकता है। बरसात में जब सरजू नदी में पानी उफान पर होता है, तो हर बार ये अस्थायी पुल बह जाता है, जिससे आवागमन बंद हो जाता है। तब लोगों को तीन किलोमीटर का रास्ता 20 किलोमीटर का फेरा लगाकर तय करना पड़ता है।
मांझा निवासी मनजीत सिंह ने बताया कि हर बरसात में, आने-जाने वाले जनप्रतिनिधियाें से लोग नया पुल बनवाने की मांग करते हैं, लेकिन कोई ध्यान नहीं देता। पूर्व प्रधान परमजीत सिंह पम्मी ने बताया कि मांझा नदी के जर्जर लकड़ी के पुल के कारण इस पर से निकलने में हर समय दुर्घटना की आशंका रहती है। कक्कू सिंह ने बताया कि पुल बना होता तो व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आती, लेकिन कोई ध्यान ही नहीं देता।
करीब 20 हजार की आबादी है प्रभावित
सरयू नदी के मांझा घाट पर पक्का पुल बनने से करीब 20 हजार से अधिक आबादी को फायदा मिलेगा। इस पुल को बनवाने की मांग गुरमीत सिंह, बबलू, संतोष, परमजीत सिंह आदि ने भी की थी। दबाव बनाने के लिए विधानसभा चुनाव का भी बहिष्कार किया था। चुनाव में पुल बनाने का आश्वासन दिया गया था, उसके बाद बहिष्कार समाप्त हुआ था, लेकिन चुनाव के बाद हालात जस के तस हैं।
पुल बनवाने या प्रस्ताव के लिए उच्चाधिकारियों या शासन की तरफ से कोई आदेश नहीं आया है। इसलिए पुल निर्माण के लिए कोई प्रस्ताव अब तक नहीं गया है। - राजीव निगम, एसडीएम निघासन
पुल बनवाने की मांग शासन से की गई है, जो अब तक पूरी नहीं हो सकी है। मामले को लोकसभा सत्र में जोर-शोर से उठाया जाएगा। - उत्कर्ष वर्मा, सांसद खीरी