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छह दिन से प्लेटफार्म और रेलवे कॉलोनी में पानी की है दिक्क्त

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गर्मी में रेलवे कॉलोनी में रहने वाले लोगों के साथ यात्री भी हैं परेशान
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स्थानीय जिम्मेदार अब करा रहे दूसरी जगह नल की बोरिंग
लखीमपुर खीरी। पांच दिन बाद भी रेलवे परिसर में पानी का संकट दूर नहीं हो सका है, जबकि उसम भरी गर्मी में रेलवे कॉलोनी में रहने वाले लोगों के साथ यात्री तक परेशान है। उधर, जिम्मेदारों ने पेयजल आपूर्ति के लिए रेल डाकघर के पास नल की बोरिंग करानी शुरू की है। ऐसे में रेल लाइन के पार कॉलोनी में रहने वालों को पानी कैसे मिलेगा। इस पर जिम्मेदार चुप्पी साधे हैं।
छह दिन पहले रेलवे परिसर में लगे पंप का मोटर जल गया था। तब से लेकर अब तक रेलवे में पानी का संकट बरकार है। इसके लिए न तो स्थानीय जिम्मेदार गंभीर हैं और न ही मंडल कार्यालय पर बैठे लोग। उमस भरी गर्मी में पिछले छह दिन से रेलवे यात्री से लेकर रेलकर्मी एवं कॉलोनी में रहने वाले लोग पानी के लिए परेशान हैं। रेल परिसर में पर्याप्त हैंडपंप तक नहीं हैं। ऐसे में कॉलोनी में रहने वालों के लिए सिर्फ नगर पालिका के टैंकर ही सहारा हैं। हालांकि इन टैंकरों से लोगों को पर्याप्त पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। ऐसे में रेल कर्मचारी से लेकर आरपीएफ और जीआरपी के लोग नहाने तक को तरस रहे हैं।
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अधिकारियों को किया जा रहा गुमराह
जिन पर रेल परिसर में पानी की उपलब्धता बनाए रखने की जिम्मेदारी है वह लोग लखनऊ में बैठे अधिकारियों को गुमराह कर रहे हैं। स्थानीय जिम्मेदारों का कहना है कि रेल परिसर में चार सरकारी हैंडपंप लगे हैं, जबकि मौजूद सिर्फ दो हैं। वैकल्पिक व्यवस्था के लिए रेलवे प्लेटफार्म पर हैंडपंप तक नहीं है। ऐसे में यात्रियों को पीने के पानी की दिक्क्त हो रही है। लोग बताते हैं पहले प्लेटफार्म एक पर हैंडपंप था, जिसे उखड़वा दिया गया। हालांकि अधिकारियों इस बात का भरोसा दिलाने के लिए पानी की कोई दिक्क्त नहीं है इसके लिए डाकघर के पास नल की बोरिंग कराई जा रही है। हालांकि कॉलोनी वासियों को पानी कैसे मिलेगा यह तो आईडब्ल्यू ही बता सकते हैं।
पंप में दूसरा मोटर डलवाया था, जिससे करीब डेढ़ मीटर पानी भरा था। इसके बाद वह भी जल गया। अब दूसरे ठेकेदार से बात हुई है। कल सुबह तक मशीन आने की संभावना है। नगर पालिका के टैंकरों से ही आपूर्ति की जा रही है। - तेज सिंह, आईडब्ल्यू, रेलवे स्टेशन लखीमपुर
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ये कोई इश्यू नहीं है। समस्या आने पर कुछ दिक्कत तो होती ही है। इसका समाधान करने का प्रयास जारी है। एक-दो दिन में लोगों को पानी की आपूर्ति पहले की तरह मिलने लगेगी। - महेश गुप्ता, जनसंपर्क अधिकारी, पूर्वोत्तर रेलवे, लखनऊ मंडल
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