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Lakhimpur Kheri: लोगों के आक्रोश से बचने के लिए बाघिन को दी 'कैद' की सजा, वन विभाग ने चिड़ियाघर भेजा

Sat, 18 Nov 2023 05:09 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी

सार

बासुकपुर गांव में खेत पर गए एक ग्रामीण को बाघिन ने हमलाकर मार डाला था। घटना से गुस्साए लोगों ने युवक का शव रखकर सड़क पर हंगामा किया था। इसके बाद वन विभाग की टीम ने ट्रेंक्युलाइज कर बाघिन को पकड़ा गया। वन विभाग ने उसे कानपुर चिड़ियाघर भेजा है।  
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पिंजरे में कैद बाघिन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लखीमपुर खीरी में दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की मैलानी रेंज के जंगल से सटे बासुकपुर गांव में ग्रामीण को मार डालने वाली बाघिन को कैद की सजा मिली है। लोगों का आक्रोश न झेलना पड़े, इसलिए वन विभाग ने पूरी तरह स्वस्थ बाघिन को कानपुर चिड़ियाघर भेज दिया है। बाघों के लिए प्रसिद्ध दुधवा टाइगर रिजर्व की बाघिन अब पिंजरे में कैद होकर रह जाएगी।
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बीते बुधवार को बासुकपुर गांव में खेत पर गए एक ग्रामीण को बाघिन ने हमलाकर मार डाला था। गुस्साए लोगों ने जमकर हंगामा करते हुए नौ घंटे तक पुलिस को शव नहीं उठाने दिया। स्थानीय लोग वन विभाग की लापरवाही से गुस्से में थे। लोगों के आक्रोश को देखते हुए वन विभाग ने बृहस्पतिवार को आनन-फानन पांच साल की बाघिन को ट्रेंक्युलाइज कर पिंजरे में कैद कर लिया।

मैलानी रेंज में पशु चिकित्सक डॉ. दयाशंकर ने उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया, तो वह पूरी तरह स्वस्थ मिली। बृहस्पतिवार रात में उसे बकरे का गोश्त दिया गया, जिसे बाघिन ने बड़े चाव से खाया और पानी भी पिया। शुक्रवार सुबह भी उसे गोश्त दिया और पानी पिलाया गया। 
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करीब 18 घंटे तक मंथन चलने और बाघिन की गतिविधियों पर नजर के बाद पीसीसीएफ वन्यजीव और एफडी ललित वर्मा के निर्देश पर दोपहर बाद रैपिड रिस्पांस वैन से एसडीओ बफरजोन मोहम्मद साकिब खान, रेंजर मैलानी अनिल कुमार, फॉरेस्टर अखिलेश सिंह, पशु चिकित्सक डॉ. दीपक वर्मा, चालक नबी शेर खां, वाचर ज्ञानचंद्र और मुशर्रफ बाघिन को कानपुर चिड़ियाघर लेकर रवाना हुए। पिछले पांच साल तक जंगल में स्वछंद विचरण करने वाली बाघिन अब कानपुर के चिड़ियाघर में सलाखों के अंदर वक्त काटेगी।

 

दांत और नाखून पूरे, पंजे भी ठीक... फिर भी भेजा चिड़ियाघर
वन्यजीवों को आबादी में आने से रोकने की जिम्मेदारी वन विभाग की है। अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहे वन विभाग ने बाघिन को कैद दे दी। चिकित्सकीय जांच में बाघिन के दांत और नाखून पूरे थे। पंजों में भी कहीं कोई कमी नहीं थी। वह शिकार करने में पूरी तरह सक्षम मिली। इसके बावजूद वन विभाग ने ग्रामीणों के गुस्से को देखते हुए उसे कानपुर चिड़ियाघर भेजने का निर्णय लिया गया। आमतौर पर बाघ या बाघिन को स्वस्थ पाए जाने पर जंगल में छोड़ दिया जाता है। 
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अहम तथ्य
  • दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की मैलानी रेंज जंगल से सटे छेदीपुर गांव में सक्रिय एक बाघ ने अगस्त 2016 में नौ लोगों पर हमला कर मौत के घाट उतार था। स्वास्थ्य परीक्षण में उसके दांत टूटे मिले थे। वन विभाग ने इस बाघ को लखनऊ चिडियाघर भेजा था।
  • उत्तर निघासन रेंज के मझरा पूरब गांव में सक्रिय एक बाघिन ने छह लोगों को मौत के घाट उतारा था। 29 जून  2022 को बाघिन की जगह बाघ कैद हो गया। इस बाघ को वन विभाग ने बेहोश कर पकड़ा। मेडिकल जांच में इसकी सेहत फिट पाई गई। इसके तीन दिन बाद इसे जंगल में छोड़ दिया गया। 
  • एक जुलाई 2022 को एक बाघिन इसी पिंजरे में कैद हुई। मेडिकल जांच में इसके दांत टूटे पाए गए। इसे चिड़िया घर भेजा गया। 
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