वन विभाग की निगरानी में गन्ने की कटाई करते किसान। स्रोत : वन विभाग।
बांकेगंज। मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी डॉ. एच राजामोहन ने दुधवा और बफरजोन के डीएफओ के साथ बैठक कर इसके रोकथाम के उपायों पर चर्चा की गई। इसमें तय किया गया कि जंगल से सटे गांवों के किनारे किसानों की गन्ना फसल कटाई वन विभाग की निगरानी में कराई जाएगी।
दुधवा टाइगर रिजर्व जंगल के आसपास बसे किसानों को सर्दियों के मौसम में गन्ना फसल कटाई किसी चुनौती से कम नहीं है। वहां छिपे बैठे बाघ व अन्य हिंसक वन्यजीव हमला कर उन्हें गंभीर घायल करने के साथ जान भी ले रहे हैं। बावजूद इसके वन विभाग अभी तक इन घटनाओं की रोकथाम के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा सका है। जिससे लोगों का वन विभाग के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
डीटीआर के एफडी डॉ. एच राजामोहन ने बताया कि गन्ने के सीजन में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोकथाम को लेकर टाइगर रिजर्व प्रशासन बेहद गंभीर है। इसको लेकर दुधवा के उप-निदेशक जगदीश आर,बफरजोन डीएफओ कीर्ति चौधरी को निर्देश दिए गए जंगल से सटे खेतों में किसानों की गन्ना फसल कटाई वन विभाग की निगरानी में कराई जाए। इसके लिए वन कर्मियों की टीमें गठित की जाएं, जो फसल कटाई के दौरान किसानों के खेतों में मौजूद रहेंगी। साथ ही डीएम और जिला गन्ना अधिकारी को पत्र भेजकर बाघ प्रभावित क्षेत्रों में किसानों के चीनी मिलों में आपूर्ति किए जाने वाले गन्ना फसल की पर्ची उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।
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