शाहजहांपुर में उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के संभागीय नाट्य समारोह में बुधवार को आखिरी वसंत नाटक का मंचन किया गया। इसमें झगड़े के बाद विदेश में गए बेटे को वापस लाने और अपनत्व का भाव समझाया गया।
गांधी भवन के सभागार में बुधवार शाम को प्रस्तुत नाटक में दिखाया गया कि बुजुर्ग सुधीर और उनकी पत्नी का बेटे रणदीप के साथ आए दिन झगड़ा होता है। दंपती झगड़े से निपटने का प्रयास करते हैं, लेकिन एक दिन बेटा उन्हें छोड़कर कनाडा में जाकर बस जाता है। वहां वंदना से शादी कर लेता है।
संपत्ति को लेकर विवाद होने कश्बाद सुधीर और गीता बेटे और बहू को वापस लाना चाहते हैं। वह उन्हें लाने का प्रबंध करते हैं, लेकिन तभी जेल से भागे अपराधी राधू का उनकी जिंदगी में प्रवेश होता है। वह सब गड़बड़ कर देता है। अफरा-तफरी के बीच मूल सच्चाई सामने आती है।
इन कलाकारों ने किया अभिनय
नाटक में मंच पर प्रख्यात फ़िल्म अभिनेता डॉ. अनिल रस्तोगी, चित्रा मोहन, अलका विवेक, विकास श्रीवास्तव, संजय देगलूरकर, वंश श्रीवास्तव ने अपने अभिनय से प्रभावित किया। इसके अतिरिक्त मंच से परे प्रकाश व्यवस्था में देवाशीष मिश्रा, संगीत संचालन विवेक श्रीवास्तव का रहा।
कार्यक्रम का संचालन इंदु अजनबी ने किया। अंत में मंथन आर्ट्स सोसाइटी के अध्यक्ष शिवा सक्सेना ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस दौरान वरिष्ठ रंगकर्मी शमीम आज़ाद, जरीफ मलिक आनंद, अनिल द्विवेदी, राजाराम, कृष्ण कुमार, मनोज मंजुल, कप्तान, योगेश, प्रेम इत्यादि मौजूद रहे।