सहभागी वन प्रबंधन और निर्धनता उन्मूलन के परियोजना निदेशक वीएम अरोड़ा ने मोहम्मदी रेंज के बिझौली गांव का भ्रमण किया। उन्होंने जायका परियोजना के तहत स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आत्मनिर्भरता के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों का जायजा लिया। इस दौरान वह स्वयं सहायता समूह के सदस्यों से मिले, और उन्होंने बकरी पालन के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने समूह की महिला सदस्यों को धुंआ रहित चूल्हे के प्रयोग की सलाह दी।
वन विभाग जायका परियोजना के तहत ग्रामीणों की वनों पर निर्भरता कम करने को लेकर ग्राम बिझौली में तीन सहायता समूहों का गठन कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास कर रहा है। इसके लिए स्वयं सहायता समूहों को 48-48 हजार रुपये देकर रोजगार उपलब्ध कराया गया था। गांव की महिलाओं ने जय मां संतोषी और जय मां लक्ष्मी स्वयं सहायता समूहों का गठन कर रुई से दीपक की बत्ती बनाने का काम शुरू किया, वहीं पुरुषों का सिंगहा बाबा समूह बकरी पालन कर ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बना रहा है।
डीएफओ नीरज कुमार ने बताया सर्वोदय आश्रम हरदोई की कोआर्डिनेटर वंदिता सचान ने महिलाओं के समूह को रुई से बत्ती बनाने का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि समूह की महिलाएं दिल्ली से रुई लाकर बत्ती बनाने का काम कर डेढ़ गुना लाभ उठा रहीं है।
इस दौरान पीडी ने समूहों के कार्य का निरीक्षण करने के बाद पुरुषों को बकरी पालन संबंधी टिप्स दिए। उन्होंने बताया कि बकरा और बकरी को मक्का और गुड़ खिलाएं इससे उनका वजन बढ़ता है।
इस मौके पर रेंजर मोहम्मदी हरद्वार सिंह यादव, वन दरोगा कुदरत अली, आरए राठौर, आलोक सक्सेना, सर्वोदय आश्रम समिति के राम सिंह, कृष्ण कुमार, श्याम किशोर शुक्ल सहित स्वयं सहायता समूहों के सदस्य मौजूद रहे।