लखीमपुर खीरी। जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत बने कई इज्जतघरों की इज्जत अब नहीं बची है। रविवार को जिले के विभिन्न क्षेत्रों में की गई पड़ताल में कहीं व्यक्तिगत शौचालयों के पल्ले टूटे मिले, कहीं दीवारें लोना लगने से उखड़ गईं, कहीं टैंक भरकर ओवरफ्लो हो रहे हैं तो कई सार्वजनिक और विद्यालयों के शौचालयों का स्टोर रूम की तरह इस्तेमाल हो रहा है।
नतीजतन कुछ लोग आज भी खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं। हालांकि, कुछ लोगों की खुले में शौच जाने की पुरानी आदत भी इसकी एक वजह बताई जा रही है। खुले में शौच के दौरान जंगली जानवरों के हमले जैसी घटनाएं भी हो चुकी हैं।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले की 1165 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय बनाए गए और लाखों गरीब परिवारों को व्यक्तिगत शौचालय उपलब्ध कराए गए। पंचायतीराज विभाग के अनुसार, अब तक 7,15,662 लोगों को व्यक्तिगत शौचालय का लाभ दिया जा चुका है। बढ़े परिवारों को भी हर छह माह में सर्वे कर लाभ दिया जाता है। प्रत्येक व्यक्तिगत शौचालय के निर्माण पर 12 हजार रुपये खर्च किए जाते हैं।
पड़ताल में निघासन के रकेहटी संविलयन विद्यालय का सार्वजनिक शौचालय बदहाल मिला। उसके दरवाजे टूटे थे और गंदगी फैली थी। रकेहटी कस्बे के सुभाषनगर वार्ड में रामफली के घर के बाहर बने व्यक्तिगत इज्जतघर का पल्ला गायब मिला, जिसकी जगह बोरी लगी थी। सुमन के घर के इज्जतघर का पल्ला भी टूटा मिला, जबकि जमुना ठठेर के घर के इज्जतघर की दीवार की ईंटें लोना लगने से उखड़ गई थीं।
बिजुआ ब्लॉक के संविलियन विद्यालय बस्तौली में शौचालयों पर ताले लगे मिले, जिससे छात्र-छात्राओं को बाहर जाना पड़ता है। अमीरनगर में वर्ष 2017-18 में बने व्यक्तिगत शौचालय जर्जर हो चुके हैं। कहीं गेट टूटे हैं तो कहीं दीवारें क्षतिग्रस्त हैं। बरवर क्षेत्र के गांव पैकीपुर में वर्ष 2017-18 में बने व्यक्तिगत शौचालय उपयोग लायक नहीं बचे हैं। इनमें कंडे, टायर और अन्य सामान रखा मिला।
रकेहटी के सुभाषनगर में शौचालय का हाल। संवाद
रकेहटी के सुभाषनगर में शौचालय का हाल। संवाद