शहर को कचरा मुक्त करने की जिम्मेदारी जिस नगर पालिका प्रशासन के कंधों पर है, कूड़ा निस्तारण को लेकर उसके हाथ आज भी खाली हैं। कहने को तो नगर पालिका के पास कूड़ा निस्तारण प्लांट है, लेकिन वह काफी नहीं है। प्लांट की क्षमता पांच मीट्रिक टन प्रतिदिन की है, जबकि शहर से करीब 57 मीट्रिक टन कूड़ा प्रतिदिन निकल रहा है।
शहर के नगर पालिका क्षेत्र में करीब चार लाख की आबादी है। नगर पालिका के लगभग सभी मोहल्लों में खाली प्लॉट पड़े हुए हैं। नगर पालिका से शत-प्रतिशत कूड़ा कलेक्शन न हो पाने की वजह से लोगों ने इन खाली पड़े प्लॉटों को ही कूड़ाघर बना दिया है। इससे यहां से निकलने में न सिर्फ मुश्किलें हैं, बल्कि मच्छरों के पनपने से संक्रामक रोगों के फैलने का भी खतरा बना हुआ है।
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नगर पालिका प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। लोगों का कहना है कि मोहल्ले से शत-प्रतिशत घरों से कूड़ा कलेक्शन नहीं हो पाता है। इसलिए लोगों को मजबूरन खाली प्लॉट में कूड़ा फेंकना पड़ता है। कूड़ा हवा से उड़कर नालियों और सड़कों पर फैल जाता है। नगर पालिका को ध्यान देकर खाली प्लाॅट और घरों से कूड़ा इकट्ठा करना चाहिए। ताकि संक्रामक रोग न फैलें।
दावा : 65 मीट्रिक टन की क्षमता वाला बनाया जाएगा प्लांट
कूड़ा निस्तारण के लिए नगर पालिका ने शहर से करीब आठ किलोमीटर दूर अंदेशनगर में प्लांट बनवाया है। यहां कूड़ा निस्तारण की पांच मीट्रिक टन प्रतिदिन की क्षमता है, लेकिन शहर से करीब 57 मीट्रिक टन कूड़ा प्रतिदिन निकल रहा है। ऐसे में करीब 52 मीट्रिक टन कूड़ा अधिक निकल रहा है। नगर पालिका कूड़ा का निस्तारण नहीं करा पा रही है। हालांकि नगर पालिका प्रशासन का कहना है कि वह 65 मीट्रिक टन की क्षमता वाले कूड़ा निस्तारण प्लांट को बना रही है।
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अंदेशनगर में कूड़ा निस्तारण प्लांट लगा है। 65 मीट्रिक टन प्रतिदिन की क्षमता वाला एक और प्लांट बन रहा है, भवन तैयार है। मशीनें आनी बाकी हैं। गीले कचरे के निस्तारण के लिए कंपोस्टर भी बनाया गया है। दो मशीनें आ गई हैं, जो गीले कचरे का निस्तारण करेंगी। प्लांट शुरू होते ही शहर में दिखाई दे रहे कचरे की समस्या खत्म हो जाएगी।