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Lakhimpur Kheri News: महाभारतकालीन है मढ़िया घाट का पारसनाथ शिव मंदिर

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मढ़िया घाट ​​स्थित पौराणिक पारसनाथ बाबा मंदिर। संवाद
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मैगलगंज। मढ़िया घाट स्थित बाबा पारसनाथ शिव मंदिर महाभारतकालीन है। सावन में यहां लखीमपुर के अलावा सीतापुर, शाहजहांपुर सहित अन्य जिलों के लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। सावन के अलावा शिवरात्रि सहित अन्य त्योहारों पर भी यहां मेले लगते हैं।
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बाबा पारसनाथ मंदिर को महाभारत काल से जोड़ा जाता है। बताया जाता है कि मंदिर में स्थापित शिवलिंग की स्थापना गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वथामा ने की थी। यही कारण है कि यह स्थान शिवभक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। हर साल विशेष रूप से सावन के महीने में यहां लाखों कांवड़िये पहुंचते हैं और गंगाजल से बाबा पारसनाथ का जलाभिषेक करते हैं।
भक्तों की आस्था का आलम यह होता है कि गोमती के तट पर स्थित इस पवित्र स्थल पर हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। यहां की धार्मिक मान्यता इसलिए भी बढ़ जाती है कि गोमती नदी मढ़िया घाट पर आकर उत्तर वाहिनी हो जाती है। इसे बेहद पवित्र माना जाता है। उत्तरवाहिनी नदी में स्नान करने और भगवान शिव का जलाभिषेक करने से पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति की मान्यता है।
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यह मंदिर रसगुल्लों के शहर मैगलंगज कस्बे से पांच किलोमीटर दूर दक्षिण में स्थित है, हालांकि आस्था और मान्यता से भरे इस तीर्थस्थल पर सुविधाओं का अभाव है। बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए न तो ठहरने की व्यवस्था है, न ही कपड़े बदलने या स्नान की। महिलाएं विशेष रूप से परेशान होती हैं। गोमती नदी के किनारे बने घाटों की हालत भी दयनीय है। न तो यहां नियमित सफाई होती है और न ही कूड़े-कचरे का समुचित निस्तारण किया जाता है। स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं की लंबे समय से मांग है कि मढ़िया घाट को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए ताकि यहां बुनियादी सुविधाएं विकसित हो सकें।
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