शासन के प्राथमिकता वाले जिले के समग्र गांवों के विकास और उन गांवों के गरीबों की हालत सुधारने में खंड विकास अधिकारी दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। उनकी इसी लापरवाही के कारण वर्ष 2014-15 में चयनित 61 लाभार्थियों के आवास अब भी अधूरे पड़े हैं। हैरत की बात यह है कि कार्य पूर्ण कराने के लिए ब्लाकों से द्वितीय किश्त के लिए डिमांड तक नहीं मांगी गई है। यही नहीं इंदिरा आवासों को लेकर वर्ष 2015-16 के लिए भी ब्लाकों से कोई कार्ययोजना नहीं बनाई गई है।
अधिकारियों के मुताबिक इंदिरा आवासों को लेकर खंड विकास अधिकारियों का रवैया उदासीन है। जिसके कारण लाभार्थियों को इंदिरा आवासों का लाभ नहीं मिल पा रहा है। वर्ष 2014-15 में इंदिरा आवासों के लाभार्थियों को प्रथम किश्त उपलब्ध करा दी गई थी, जिससे आवासों के लिंटर तक का कार्य पूर्ण हो गया है लेकिन आवास अभी अधूरे पड़े हैं। खंड विकास अधिकारियों ने आवासों का कार्य पूरा कराने के लिए परियोजना कार्यालय को द्वितीय किश्त की डिमांड तक नहीं भेजी है। जिसके कारण एक तरफ गरीबों के आवास अधूरे पड़े हैं तो वहीं दूसरी ओर इस वित्तीय वर्ष में इंदिरा आवास योजना के लाभार्थियों के लिए कोई कार्ययोजना भी नहीं बन पा रही है। अधिकारियों के मुताबिक जिले में द्वितीय किश्त उपलब्ध कराए गए 1812 आवासों में अभी तक एक भी आवास का कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है। न ही आवास की पूर्णता की तृतीय निरीक्षण आख्या इंदिरा आवास की वेबसाइट पर अपलोड नहीं कराई गई है।
मुख्य विकास अधिकारी नितीश कुमार ने बताया कि खंड विकास अधिकारियों की समीक्षा बैठक में योजना के शिथिल होने की बाबत सभी को चेतावनी दी गई है। साथ ही 17 मई तक कार्य पूर्ण कर 19 मई तक रिपोर्ट परियोजना निदेशक के कार्यालय में देने का निर्देश दिया गया है। अगर तब भी अधिकारी लापरवाही करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।