कष्टहरण नाथ मंदिर परिसर में साधु की तपस्या देखने को उमड़ रही श्रद्घालुओं की भीड़
मितौली। सावन में भोलेनाथ के भक्तों की आस्था के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। कस्बे में एक शिवभक्त साधु ने पूरे सावन खड़े रहकर शिव आराधना का संकल्प लिया है।
कस्बे से सटे कठिना नदी के किनारे पौराणिक और सिद्ध मंदिर बाबा कष्टहरण नाथ का स्थान अपनी महिमा के लिए अरसे से क्षेत्रीय लोगों में आस्था का केंद्र है। इन दिनों यह स्थान मितौली क्षेत्र के ग्राम ओढहरा निवासी 42 वर्षीय फलाहारी बाबा भारती के कारण चर्चा में है। वीरपाल से फलाहारी बाबा भारती बन चुके इस शिवभक्त ने पिछले दो साल से भोजन ग्रहण नहीं ग्रहण किया है। बाबा भारती ने सावन के पहले दिन से कष्टहरण मंदिर को अपनी आराधना स्थली बनाते हुए वहां पूरे सावन मास खड़े रहकर शिव भक्ति का संकल्प लिया है। इस कठिन निर्णय के अनुसार ही बाबा 24 घंटे खड़े रहकर फलाहार के साथ-साथ भजन कीर्तन में भी अपना समय बिता रहे हैं। इन साधु बाबा से ही प्रेरित होकर रतहरी गांव के रहने वाले मितौली ब्लॉक के पूर्व ब्लॉक प्रमुख राधेश्याम भार्गव ने भी एक माह तक बिना भोजन शिव सेवा करने का संकल्प लिया है।
अंग्रेजों से छिपाकर बनाया गया था यह मंदिर
कष्टहरण नाथ मंदिर पर लोगों की गहन आस्था है। यहां कार्तिक माह का मेला मिट्टी के बर्तनों आदि के लिए काफी प्रसिद्घ है। प्रत्येक माह की अमावस्या को लोग कठिना नदी में स्नान दान कर भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते है। लोगों का कहना है कि यह शिव मंदिर को जंगल में ब्रिटिश कॉल के दौरान अंग्रेजों से छिपा कर बनाया गया था। इसके बाद मितौली के ही रहने वाले एक सोनकर परिवार के सहयोग से 1994 में इस जीर्ण शीर्ण मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया था।