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Lakhimpur Kheri News: दुधवा टाइगर रिजर्व के 178 गांवों में ‘हरित विकास’ का मॉडल लागू

Sun, 01 Mar 2026 11:29 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
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लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व को इको सेंसेटिव जोन (ईएसजेड) घोषित किए जाने के बाद इसके दायरे में आने वाले 178 गांवों में अब ‘हरित विकास’ का खाका लागू होने जा रहा है। बफर जोन से सटे और निर्धारित परिधि के भीतर स्थित इन गांवों में विकास कार्य पूरी तरह बंद नहीं होंगे, बल्कि पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप नियंत्रित ढंग से कराए जाएंगे। इसके लिए जोनल मास्टर प्लान दो वर्ष के भीतर लागू किया जाएगा।
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मास्टर प्लान के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर निर्माण कार्य पर्यावरणीय स्वीकृति के बाद ही होंगे। पक्की सड़क, पेयजल, शौचालय, बिजली और सामुदायिक भवन जैसे बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता दी जाएगी।
हालांकि, ईंट-भट्ठा, आरा मशीन, खनन और बड़े प्रदूषणकारी उद्योग प्रतिबंधित या विनियमित श्रेणी में रहेंगे। इसके विपरीत कुटीर उद्योग, हस्तशिल्प, दुग्ध उत्पादन और जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। सोलर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसी गतिविधियां प्राथमिकता में रहेंगी।
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योजना का मकसद ग्रामीणों की आजीविका को सुरक्षित रखते हुए उन्हें प्रकृति संरक्षण से जोड़ना है। इको-टूरिज्म, गाइड सेवा, होम-स्टे और स्थानीय उत्पादों की बिक्री जैसे नए अवसर सृजित किए जाएंगे। जिला स्तरीय समिति की संस्तुति के बाद ही बड़े निर्माण कार्यों को मंजूरी मिलेगी, जिससे अनियोजित विकास पर रोक लगेगी और वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास सुरक्षित रहेगा।
चार जिलों के गांव शामिल
इको सेंसिटिव जोन में खीरी के 86 गांव शामिल हैं, जिनमें 82 दुधवा नेशनल पार्क और चार किशनपुर वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र से जुड़े हैं। इसके अलावा कतर्निया घाट वन्य जीव अभ्यारण (जनपद बहराइच) के 89 गांव भी जोड़े गए हैं। बफर जोन में पीलीभीत के दो और शाहजहांपुर का एक गांव भी शामिल है।
तीन श्रेणियों में बंटे क्रियाकलाप
दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी डॉ. एच. राजामोहन के अनुसार, इको सेंसेटिव जोन में गतिविधियों को प्रतिबंधित, विनियमित और संवर्धन-तीन श्रेणियों में बांटा गया है। संवर्धन श्रेणी में 11 प्रकार के कार्य होंगे, जिनसे गांवों में संतुलित विकास को गति मिलेगी। 11 विभागों के आधार पर कार्ययोजना तैयार की जा रही है, जिस पर शीघ्र अमल शुरू होगा।
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