सहन पर कब्जा करने की रंजिश के चलते वृद्ध की चाकू घोंपकर हत्या करने के मामले में एडीजे हाजी अशरफ अंसारी ने रिक्शा चालक हत्याभियुक्त को दोषी पाया है। उसे आजीवन कारावास और 21 हजार रुपये का जुर्माना भरने की सजा सुनाई गई है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी रामस्वरूप वर्मा ने बताया कि मैलानी थाना क्षेत्र के ग्राम बोझिया निवासी आशाराम के पड़ोस में ही महेश का परिवार रहता था और मकान से सटी सहन की जमीन को कब्जाने के मामले में दोनों परिवार के बीच रंजिश चली आ रही थी। इसी बीच सात जून 2012 की शाम साढ़े आठ बजे आशाराम रिक्शा चलाकर लौटा तो महेश के पड़ोसी राजेंद्र के दरवाजे पर खड़ा होकर गालियां देने लगा। आरेाप है कि सार्वजनिक रूप से गाली गलौज सुनकर महेश के पिता मिश्रीलाल जब राजेंद्र के दरवाजे पर पहुंचकर गाली-गलौज से देने से मना किया तो आशाराम ने मिश्रीलाल के पेट में चाकू घोंप दिया। घरवाले जब मिश्रीलाल को लेकर गोला अस्पताल पहुंचे तो वहां डॉक्टर्स ने मिश्रीलाल को मृत घोषित कर दिया। इसके तीसरे दिन नौ जून को आशाराम पकड़ा गया तो उसकी निशानदेही पर खून से सना चाकू भी बरामद हुआ। अदालती सुनवाई के दौरान महेश कुमार, सुरेश कुमार, एसआई बुद्धसेन, डॉ. वीके वर्मा और एसआई जितेंद्र बहादुर यादव की गवाही दर्ज हुई। वहीं रिक्शा चालक की ओर से कोई वकील न होने के कारण अदालत ने सरकारी खर्च पर न्यायमित्र वकील उपलब्ध कराया और बचाव पक्ष को मौका भी दिया गया। इस मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए आशाराम को उम्रकैद की सजा सुनाई है, साथ ही उस पर 21 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।