लखीमपुर खीरी। किशोरी से यौन अत्याचार के सात साल पुराने मामले में गवाही से भाग रहे एएसपी रविंद्र वर्मा के खिलाफ एडीजे गुलाम मुस्तफा ने कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी है। लखनऊ में तैनात एएसपी का वेतन रोकने का पूर्व में आदेश दिया था। अब उन्हें पेश कराने के लिए अब गृह सचिव को आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 दिसंबर की तारीख मुकर्रर की गई है।
कोतवाली सदर में 24 अगस्त, 2018 को 14 साल की लड़की के अपहरण की नामजद रिपोर्ट एक दलित युवती ने कोतवाली सदर के जयेंद्रपुर निवासी दिनेश शर्मा, रामप्यारी, संदीप, छोटेलाल और दीनदयाल सहित छह आरोपियों के खिलाफ दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि 18 अगस्त, 2018 को सुबह 10 बजे उसकी नाबालिग लड़की शौच के लिए जा रही थी, तभी रामप्यारी और उसके पति सहित अन्य आरोपी आए और उसे जबरन पकड़कर मुंह दबाकर अपने साथ लखनऊ लेकर चले गए थे।
वहां से किशोरी को महाराष्ट्र के बीड जिले में ले जाया गया था। कई महीने बाद पीड़िता को तलाशा गया था, तब अदालत में बयान दर्ज कराने के बाद विवेचना करते हुए तत्कालीन सीओ रविंद्र वर्मा ने दिनेश शर्मा के साथ ही तेजीराम, रामप्यारी, संदीप, छोटेलाल और दीनदयाल के खिलाफ चार्जशीट अदालत में दाखिल की थी। इसमें सुनवाई चल रही है। इसी बीच मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो छह महीने के भीतर इसे निबटाने के निर्देश दिए गए हैं।
इस मामले में विवेचना करने वाले तत्कालीन सीओ रविंद्र वर्मा की हाजिरी सुनिश्चित करने के लिए कई बार पत्र भेजे गए। समन और नोटिस मिलने के बाद भी वह हाजिर नहीं हुए तो अदालत ने उनके खिलाफ एनबीडब्ल्यू जारी किए थे, मगर वह फिर भी हाजिर नहीं हुए तो लखनऊ पुलिस कमिश्नर को उनका वेतन रोकने के आदेश दिए गए। एडीजे गुलाम मुस्तफा ने मंगलवार को गृह सचिव को पत्र भेजकर लखनऊ में तैनात एएसपी की हाजिरी सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं।