ओयल। साल 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले एमसीएच बिल्डिंग को हैंडओवर कराने में माननीयों की ओर से की गई जल्दबाजी अब मरीजों के लिए मुसीबत बन रही है। मानक विहीन निर्माण होने के चलते आए दिन दीवारों से टाइल्स छूटकर गिर रहे हैं, तो वहीं सीलिंग फॉल्स गिर रही है। उधर, शौचालय में भी पाइप लाइन तक मानक के अनुरूप नहीं डाले गए हैं। इससे शौचालय चोक होने के कारण उनमें ताला डाल दिया गया है।
मोतीपुर गांव में बने एमसीएच विंग के निर्माण पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, लेकिन फिर भी भवन मानक विहीन है। इसका प्रमाण दीवारों से छूटता प्लास्टर है। 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में वाहवाही लेने के लिए माननीयों ने आधी अधूरी बिल्डिंग हैंडओवर कराकर शेष निर्माण कार्य एक साल के अंदर पूरा कराने के लिए ठेेकेदार को निर्देश दिए। मगर, भवन हैंडओवर होने के बाद न तो माननीयों ने एमसीएच विंग की सुध ली और न ही अफसरों ने। ठेकेदार ने दो साल में एक भी ईंट लगवाना जरूरी नहीं समझा। इस कारण न तो डॉक्टर व स्टाफ के आवास बन पाएं हैं और न ही रोड बन सकी है। हाइवे से अस्पताल जाने वाला मुख्य रास्ता तक अधूरा है।
यह निर्माण हैं अधूरे
एमसीएच विंग में अभी टाइप-टू के 16 व डॉक्टरों के लिए टाइप-फोर के छह आवास अधूरे हैं। आवास अधूरे होने से डॉक्टर, स्टाफ नर्स लखीमपुर से आते जाते हैं। ऐसे में अक्सर डॉक्टर व स्टाफ देर से पहुंचते हैं। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है।
एमसीएच विंग की बिल्डिंग हैंडओवर करने के लिए दो सदस्यीय टीम गठित कर निरीक्षण कराया गया था। हालांकि, अभी तमाम निर्माण कार्य अधूरे हैं। एमसीएच भवन की दीवारों से टाइल्स तक छूटकर गिर रहे हैं। दीवारों और फर्श से सीलन तक आ रही है। अधूरा निर्माण कार्य पूरा कराने के लिए कई बार ठेकेठार को पत्र भी लिखा, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया गया।
-डॉ. एसी श्रीवास्तव, सीएमएस एमसीएच विंग
जिला अस्पताल की सीलिंग फाल
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