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अद्भुत वास्तुकला की पहचान है सिंगाही का भूलभुलैया शिव मंदिर

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सिंगाही का भूलभुलैया शिव मंदिर।
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खैरीगढ़ स्टेट की महारानी सुरथ कुमारी शाह ने सौ साल पहले बनवाया था मंदिर
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वर्तमान में देखरेख और रखरखाव के अभाव में मंदिर का वैभव हो रहा है क्षीण
सिंगाही/निघासन। जिले की सबसे प्राचीन और समृद्घ रियासत खैरीगढ़ स्टेट की राजधानी रहे सिंगाही कस्बे के निकट पवित्र सरयू नदी के किनारे स्थित सिंगाही कस्बे का भूलभुलैया शिव मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला के लिए जाना जाता है। वर्तमान में देखरेख और रखरखाव के अभाव में इस शानदार मंदिर का वैभव क्षीण हो रहा है। सावन के दिनों में यहां काफी भीड़ रहती है।
यह भूलभुलैया मंदिर एक भव्य शिवमंदिर है, जिसका दूसरा नाम नर्मदेश्वर महादेव मंदिर है। इसका निर्माण तत्कालीन खैरीगढ़ स्टेट की महारानी सूरथ कुमारी देवी ने अपने पति स्व. राजा इंद्र विक्रम शाह की पुण्य स्मृति में करवाकर उसमें नर्मदा नदी से लाकर शिवलिंग की स्थापना की थी। मंदिर में लगे शिलालेख से इसके निर्माण का समय वर्ष 1926 पता चलता है।
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बुजुर्गों का कहना है कि राजमहल के अंदर से भूलभूलैया तक एक सुरंग भी बनाई गई थी, जिसके जरिए महारानी सरयू नदी में स्नान और मंदिर में पूजा के लिए जाती थीं। इस सुरंग और भूलभुलैया को काफी समय पहले बंद करवा दिया गया है।
इसके साथ ही भूलभुलैया के एक तरफ हवन कुंड बनाया गया है। करीब तीन मीटर ऊंचे और अष्टकोणीय प्लेट फार्म के मध्य में अष्टकोणीय गर्भगृह स्थित है। मंदिर के चारों ओर मंदिर तक पहुंचने के लिए चक्करदार सीढ़ियां हैं। प्लेटफार्म के चारों ओर बनी इन सीढ़ियों के बीच में चारों ओर दरवाजे हैं जो भूमिगत भूलभुलैया के प्रवेश द्वार हैं। गर्भगृह में काले रंग का शिवलिंग स्थापित हैं। सामने सफेद संगमरमर की नंदी प्रतिमा स्थापित है। (संवाद)
दुधवा आने वाले सैलानियों के लिए मंदिर हो सकता है आकर्षण का केंद्र
भूलभुलैया में बना शिव मंदिर लोगों की गहन आस्था का केंद्र है। हजारों श्रद्घालु और सैलानी इस अद्भुत शिव मंदिर में दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं लेकिन शासन प्रशासन की उदासीनता के चलते इस भव्य संरचना को अभी तक पर्यटन के नक्शे में शामिल नहीं किया जा सका है, जबकि यह मंदिर दुधवा नेशनल पार्क के पास स्थित है। दुधवा आने वाले सैलानियों के लिए यह मंदिर आकर्षण का केंद्र हो सकता है।
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जर्जर हो चुकी है मंदिर जाने वाली सड़क
एतिहासिक भूलभुलैया में बने शिव मंदिर पर आने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सड़कें जर्जर हैं। पं. देवेंद्र गिरी उर्फ लल्ला बाबा ने बताया कि इसी रास्ते से जिले के प्रशासनिक अधिकारी, राजनेता और सामाजिक कार्यकर्ता आए दिन गुजरते हैं। इस स्थान को पर्यटन स्थल बनाने के लिए प्रयास करने की बात भी करते हैं, लेकिन इस जर्जर हुई सड़क की ओर किसी का ध्यान नहीं है।
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