जिले के दुधवा नेशनल पार्क के जंगलों में थारू जनजाति की 37 ग्राम सभाएं हैं। समाज की मुख्य धारा से कोसों दूर इस जनजाति की जीविका आज भी मछली पकड़ने एवं आखेट पर निर्भर है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर डीएम किंजल सिंह ने थारू : द राइजिंग प्रोग्राम के माध्यम से इस जनजाति का विकास शुरू किया। थारू महिलाओं को दैनिक उपयोग की वस्तुएं बनाने के लिए कार्यक्रम चलाकर स्वयं सहायता समूह बनाकर हुनरमंद बनाया गया। उन्हें मध्य प्रदेश के आदिवासी ग्राम ओरछा का भ्रमण कराया गया। डीएम के सहयोग से इन उत्पादों की ऑनलाइन मार्केटिंग भी शुरू कर दी गई। इससे थारू विकास को जहां पंख लग गए, वहीं सूबे की राजधानी लखनऊ में विधानसभा के सामने होने वाली गणतंत्र दिवस परेड में थारू विकास की झांकी प्रदर्शित करने का न्योता मिला। झांकी में जंगल, झोपड़ी सहित थारू जीवन और विकास यात्रा को प्रदर्शित किया जाएगा। झांकी के साथ 60 थारू युवतियां और डीएम किंजल सिंह समेत जिले के चार अधिकारी भी शामिल होंगे।
सूबे की परेड में पहली बार शामिल होगी लखीमपुर की झांकी
डीएम किंजल सिंह का कहना है कि सूबे की राजधानी लखनऊ स्थित विधानसभा के सामने जिला प्रशासन की झांकी को पहली बार आमंत्रित किया गया है। इससे वह बेहद खुश हैं। थारू जनजाति के विकास गाथा की झांकी के गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने से यहां की प्रतिभाओं को प्रेरणा मिलेगी।
सीएम के निर्देशन में इस तरह हुआ थारू विकास
पहले चरण में थारू महिलाओं के स्वयं सहायता समूह बनाकर ''हुनर कार्यक्रम चलाया गया। इसके अंतर्गत महिलाओं में हुनर भरने के लिए मध्य प्रदेश के आदिवासी ग्राम ओरछा का भ्रमण कराया गया। आज थारू महिलाएं दरी, हैंडबैग, कैप, चप्पल, पंखा, जूट का कवर फाइल आदि का न सिर्फ निर्माण कर रही हैं, बल्कि डीएम के सहयोग से इन उत्पादों की ऑनलाइन मार्केटिंग शुरू कर दी गई है। दूसरे चरण में थारू महिलाओं एवं युवतियों को आत्मरक्षा के लिए जूडो एवं कराटे सिखाकर लखनऊ में 1090 पावर वूमेन का भी प्रशिक्षण भी दिलाया गया है। तीसरे चरण में थारू जनजाति की ग्राम सभाओं में डीएम के नेतृत्व में सात दिवसीय प्रवास के माध्यम से द राइजिंग कार्यक्रम चलाकर कला, साहित्य, संगीत, नृत्य समेत विभिन्न योजनाओं का लाभ भी दिलाया गया। थारू विकास को उस समय पंख लग गए, जब गोवा में आयोजित ‘लोकोत्सव-2016’ में थारू स्वयं सहायता समूहों द्वारा प्रतिभाग किया गया। गोवा के मुख्यमंत्री ने भी थारू जनजाति की प्रतिभाओं की प्रशंसा की। यह चौथा चरण रहा, जबकि पांचवें चरण में भारतीय लोकतंत्र को समझने के लिए 40 थारू छात्राओं एवं 03 स्वयं सहायता समूह के प्रतिनिधियों के अध्ययन दल ने ब्यूरो आफ पार्लियामेन्ट्री स्टडीज नई दिल्ली के अध्ययन कार्यक्रम में प्रतिभाग किया तथा संसद का भ्रमण किया।