लखीमपुर खीरी। जिले में धान कटाई का कार्य तेजी के साथ किया जा रहा है। ताजा कटान होने के चलते काफी मात्रा में धान में नमी पाई जा रही है। इस समस्या को दूर करने के लिए मंडी समिति में धान सुखाने के लिए ड्रायर मशीन लगवाई गई थी, जो देखरेख के अभाव में धूल खा रही है।
इस समय मंडी समिति पहुंचने वाला धान नमी के कारण नहीं खरीदा जा रहा है। फसल सही समय पर न बिकने के चलते किसान आढ़तों और राइस मिलों पर अपना धान बेचने को मजबूर है। सरकारी केंद्रों पर 17 प्रतिशत तक नमी होने पर ही खरीद की जा रही है, जबकि धान में 20 से लेकर 22 प्रतिशत तक की नमी पाई जा रही है।
किसानों की इसी समस्या को देखते हुए मंडी समिति में करीब दस लाख रुपये की कीमत से एक ड्रायर मशीन लगवाई गई थी। जिसमें किसान अपनी नम धान की फसल को सुखाकर सरकारी रेट पर बेंच रहा था। मंडी से जुड़े सूत्र बताते हैं कि करीब दो साल से यह मशीन धूल खा रही है।
धान को सुखाकर मानक के अनुरूप बनाती है ड्रायर मशीन
ड्रायर मशीन का उपयोग करने वाले कर्मचारियों ने बताया कि धान की फसल कटने के समय उसमें नमी बनी रहती है। नमी होने के चलते कुटाई के वक्त चावल टूट जाता है। इसको देखते हुए ड्रायर मशीन में इसे सुखाने का कार्य किया जाता है। यह मशीन गर्म हवा फेंककर धान को इतना सुखा देती है कि वह मानक अनुरूप हो जाता है। फिलहाल मशीन न चलने से किसानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
किसान को देना होता है डीजल
मंडी समिति में लगी ड्रायर मशीन का उपयोग करने के लिए किसान को अपनी जेब ढीली करनी होती है। इस मशीन से अपनी फसल को सुखाने के लिए किसानों को डीजल आदि का खर्च खुद से वहन करना पड़ता है। नाम न छापने की शर्त पर एक किसान ने बताया कि मशीन में काफी डीजल की खपत होती है इससे ज्यादा अच्छा है कि वह आढ़तों पर ही अपना धान बेंच दें।
मंडी समिति में लगी ड्रायर मशीन चालू हालत में है। इस मशीन का उपयोग करने के लिए किसान को डीजल आदि का खर्चा खुद उठाना पड़ता है। इसी के चलते किसान अपनी फसल मशीन से नहीं सुखाते हैं।
- सुधांशु कुमार, मंडी सचिव