वनाधिकारी बोले, पिंजड़े में बंधी बकरी खाने के चक्कर में चकमा खा गया तेंदुआ
गोला वन रेंज में अगस्त से अक्टूबर तक वन्यजीव ले चुके हैं पांच लोगों की जान
अलीगंज/गोला गोकर्णनाथ। गोला वन रेंज में करीब तीन माह से आतंक का पर्याय बना तेंदुआ आखिरकार जमुना बाद फार्म के निकट बजाज हिन्दुस्थान शुगर लिमिटेड के कृषि फार्म में लगाए गए पिजड़े में कैद हो गया। इससे क्षेत्रवासियों ने राहत की सांस ली है। यहां बता दें कि मानव-वन्यजीव संघर्ष में गोला वन रेंज में पांच लोगों की जान जा चुकी है, वहीं 12 से अधिक लोग वन्यजीवों के हमले में मारे जा चुके हैं।
मंगलवार की सुबह लोगों ने जमुनाबाद फार्म के निकट बजाज हिन्दुस्थान शुगर लिमिटेड के कृषि फार्म में लोगों ने लगाए गए पिंजड़े में कैद तेंदुए को देखा। सूचना पर पहुंचे रेंजर संजीव कुमार तिवारी के नेतृत्व में वन विभाग के कर्मचारियों ने तेंदुए सहित पिंजरे को ट्रॉली पर लदवाकर जंगल में सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। तेंदुए के पकड़े जाने से क्षेत्रवासियों ने राहत की सांस ली है, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वन रेंज और आसपास के क्षेत्र में बाघ या तेंदुआ कितने हैं। सूचना पर पहुंचे डीएफओ दक्षिणी संजय विश्वाल ने डॉक्टरों और विशेषज्ञों की टीम के साथ मौके का निरीक्षण किया। इस मौके पर उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. फारुख, डॉ. दक्ष, डॉ. सुरेश चंद्र, वन दरोगा जयराम भारती, अजीत श्रीवास्तव, राम नरेश, नरेश कुमार, वनरक्षक अजय भार्गव, विकास सिंह मौजूद रहे।
जंगल का खूंखार तेंदुआ अब रहेगा चिड़ियाघर में
वयस्क नर खूंखार तेंदुआ का दसी क्षेत्र में आतंक था। दक्षिण खीरी वन प्रभाग के डीएफओ संजय विश्वाल ने बताया कि पिंजड़े में कैद हुआ तेंदुआ वयस्क नर और खूंखार है। पकड़े गए तेंदुए को अब चिड़ियाघर भेजा जाएगा। बाकी जीवन वह चिड़ियाघर में बिताएगा।
एक माह से गंगाकली और डायना हथिनी लगीं थी ऑपरेशन में
वन्यजीवों के ताबड़तोड़ हमलों और कई लोगों की जान जाने के बाद दहशत व्याप्त होने लगी तो 22 अक्टूबर को प्रशिक्षित गंगाकली और डायना हथिनी को वन्यजीव को पकड़ने के लिए ऑपरेशन में लगाया गया। राजकीय कृषि एवं बीज संवर्धन प्रक्षेत्र जमुना बाद फार्म और उसके इर्द-गिर्द की कंटीली झाड़ियों से आच्छादित क्षेत्रों को खंगालते रहने के साथ कई जगह पर तेंदुए के होने की पुष्टि तो हुई लेकिन पकड़ में नहीं आया। वहीं वन विभाग द्वारा जमुनाबाद फार्म के निकट बजाज चीनी मिल के कृषि फार्म में लगाए गए पिंजरे में तेंदुआ कैद होने के साथ वन विभाग के अधिकारियों ने भी राहत महसूस की।
13 अगस्त को गोला वन रेंज में हुई थी पहली घटना
गोला वन रेंज में मानव वन्यजीव संघर्ष की पहली घटना 13 अगस्त को पश्चिमी बीट के कंपार्टमेंट संख्या तीन क्षेत्र में जंगल के किनारे की ग्राम पंचायत पुनर्भू ग्रंट में हुई थी। इसमें बाघ ने मूकबधिर मुशर्रफ (30) को मार डाला था। बजाज चीनी मिल का यह वही फार्म है जहां 20 अक्टूबर को ट्यूबवेल चौकीदार 50 वर्षीय हीरालाल निवासी हैदराबाद थाना क्षेत्र के रामपुर ग्रंट 18 का शिकार किया था। तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग की पांच टीमें लगी थीं। इसमें गंगाकली और डायना हथिनी को भी पेट्रोलिंग पर लगाया गया था, सात
पिंजड़े, 25 कैमरे लगाए गए थे। वन्यजीवों के हमले में गोला वन
गोला वन रेंज की पश्चिमी बीट में 13 अगस्त को शौच को गए पुनर्भुग्रट निवासी 32 वर्षीय मूकबधिर युवक मुशर्रफ को बाघ ने अपना निवाला बना लिया था। उसके बाद 24 अगस्त को राजकीय बीज संवर्धन क्षेत्र जमुना बाद फार्म के प्रखंड संख्या 6 में चौकीदार ग्राम बक्खारी निवासी हरीराम का शव क्षत-विक्षत अवस्था में संदिग्ध परिस्थितियों में झाड़ियों में पड़ा मिला था। हालांकि वन विभाग के अधिकारियों ने इसे वन्यजीव हमले की घटना न मानकर संदिग्ध करार दिया था। चार अक्टूबर को प्रखंड तीन में चौकीदार यदुनाथ, 17 अक्टूबर की रात रसूलपुर गांव निवासी 30 वर्षीय रमाकांत, 20 अक्टूबर को रामपुर ग्रंट निवासी बजाज चीनी मिल के कृषि फार्म में ट्यूबवेल चौकीदार 50 वर्षीय हीरालाल को तेंदुआ मार चुका है।