सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश से जिले के 3635 शिक्षामित्रों का भविष्य प्रभावित होगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पता चलने के बाद जिले के शिक्षामित्रों में निराशा दौड़ गई है।
लंबे संघर्ष के बाद शासन ने शिक्षामित्रों के समायोजन पर विचार किया था तो उन्हें ऐसा लगा था कि उनकी भविष्य की चिंता का समाधान हो गया है। शासन ने शिक्षामित्रों को बीटीसी का प्रशिक्षण दिलाकर उनकी नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की। प्रथम चरण में जिले के 1050 शिक्षामित्रों को नियुक्ति पत्र दिए गए। इसके बाद ऐसा लगा कि अब जिले में मात्र 450 शिक्षकों का ही समयोजन हो पाएगा। इसके लिए भी शिक्षामित्रों ने कड़ी मेहनत की आखिर शासन ने सभी शिक्षामित्रों के समायोजन का आदेश किया। इस आदेश के बाद द्वितीय चरण में 2435 और शिक्षामित्रों को नियुक्ति मिली। इसमें सबसे बड़ा झटका प्रथम चरण के नियुक्ति पाने वाले शिक्षामित्रों को लगा है उनकी सेवा के लगभग एक वर्ष से अधिक समय बीत गया है। प्रथम चरण के शिक्षामित्रों को लगभग एक वर्ष का वेतन भी मिल चुका है। द्वितीय चरण के शिक्षामित्रों का वेतन अभी नहीं मिला है लेकिन भुगतान की प्रक्रिया चल रही थी। जिले में अब तक लगभग 250 शिक्षामित्र ऐसे हैं जिनका समायोजन होना शेष है यह वे शिक्षामित्र हैं जो इंटर पास हैं। ये लोग ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बिना टीईटी नियुक्तियों को गलत बताया है। जिले में टीईटी किए हुए शिक्षामित्रों की संख्या लगभग 100 होगी इनके सामने भी असमंजस की स्थिति है लेकिन इन लोगों को टीईटी करने का लाभ मिल सकता है फिर भी करीब 3635 शिक्षामित्रों का भविष्य अधर में है। सुप्रीम कोट की खबर पढ़कर शिक्षामित्रों में निराशा है।
जिलाध्यक्ष प्राथमिक शिक्षमित्र संघ राकेश सिंह ने बताया कि पूरी तरह अनिश्चितता की स्थिति है। शिक्षामित्रों को धैर्य रखना चाहिए । कोई न कोई रास्ता जरूर निकलेगा।