पलियाकलां (लखीमपुर खीरी)। शारदा नदी के तेवर तो नरम हो रहे हैं लेकिन घटते जलस्तर के बीच शारदा नदी अब गांवों में फसलों का तेजी से कटान कर रही है। बोझवा और मटैहिया गांवों के ग्रामीणों की बरूआ कलां में जमीनें हैं जहां उन्होंने फसलें बो रखी हैं। सैकड़ों एकड़ फसल नदी अपने आगोश में ले चुकी है। जबकि जंगल नंबर सात की ओर नदी तेजी से कटान कर रही है। यहां कटान रोकने के लिए ठोकरें लगाईं जा रही हैं लेकिन नदी के तेज बहाव में वह नाकाफी साबित हो रही है। फिलहाल यहां बचाव कार्य जारी है।
बता दें कि शारदा नदी का जलस्तर बीते तीन दिनों से कम होने लगा है पर भू कटान तेज हो गया है। नदी अब भू कटान करने लगी है। जल आयोग के जेई दुर्गेश कुमार ने बताया कि नदी का जलस्तर शनिवार को दोपहर तीन बजे तक खतरे के निशान 154.100 सेमी से 20 सेमी ऊपर 154.300 सेमी पर बह रहा है। बताया कि नदी के जलस्तर में लगातार गिरावट देखी जा रही है। उधर नदी ने भू कटान करते हुए बरूआ कलां की खेतिहर जमीनों को अपने आगोश में लेना शुरू कर दिया है। बरूआ कलां के दर्जनों किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल अब तक नदी में समा चुकी है। जिसमें गन्ने की फसल बोई हुई थी। दूसरी तरफ जंगल नंबर सात, छंगाटांडा, जगन्नाथ टांडा और ढकिया खुर्द आदि गांवों की ओर नदी तेजी से कटान करने लगी है। जिससे गांवों के ग्रामीणों में हड़कंप मचा हुआ है। ढकिया खुर्द के कई ग्रामीण तो अपने-अपने घरों को छोड़कर ऊंचे स्थानों की ओर रुख करने लगे हैं। यहां पर बोरों में भरकर ठोकरों को बनाने का कार्य किया जा रहा है लेकिन नदी इन ठोकरों को भी नदी में समा लेती है। जिससे बचाव कार्य में दिक्कत आ रही हैं लेकिन लकड़ी तथा पत्थरों के पिलर्स को बनाकर कार्य किया जा रहा है ताकि पूरे बंधे को कटने से बचाया जा सके।
शारदा ने सिंघिया और जंगल नंबर नौ की ओर किया रुख, कटान शुरू
महेवागंज/सुंदरवल। थाना फूलबेहड़ क्षेत्र और बिजुआ ब्लॉक के अंतर्गत नदी का रुख अचानक फिर सिंघिया और जंगल नंबर नौ की तरफ हो गया है। नदी का पानी करीब आते देख ग्रामीण भयभीत है। दूर दूर तक निकलने का कोई रास्ता नहीं है। करीब आठ किलोमीटर की दूरी तय कर तटबंध तक नाव से आते जाते हैं। अधिकतर रास्ते नदी में समा गए हैं या उनपर पानी भरा है।
सिंघिया और मेहंदी ग्राम पंचायत के जंगल नंबर नौ गांव में नदी ने खेतों को निगलना शुरू कर दिया है। राजस्व कर्मियों के मुताबिक सिंधिया फार्म गैर आबादी वाला क्षेत्र है। वही जंगल नंबर नौ में करीब 250 लोगों की आबादी है। हालांकि नदी का कटान अभी खेतों की ओर हो रहा है। फिलहाल जिला प्रशासन का कोई भी नुमाइंदा न तो गांव पहुंचा है और न ही कही से कोई मदद दी गई है। गांव निवासी हकीकुल्ला और इशहाक ने बताया कि चार एकड़ गन्ने की फसल नदी में समा चुकी है।
सिंघिया के लेखपाल वेद प्रकाश सिंह का कहना है कि कटान तो हो रहा है, लेकिन अभी ये कह पाना मुश्किल है कि कितनी जमीन कटी है। पानी अधिक होने से अंदाजा लगाना मुश्किल है। पानी कम हो तब सर्वे कराया जाएगा। सिंघिया बिना आबादी वाली जगह है केवल खेतों के फार्म है। जंगल नंबर नौ के लेखपाल आदित्य कुमार मिश्र का कहना है कि हल्का फुल्का कटान हो रहा है। नदी के उफान पर होने से नुकसान का अंदाजा नही लग पा रहा है। अधिकतर मेहंदी गांव की जमीन है।
रैनी गांव में भू कटान कर रही शारदा नदी
धौरहरा। शारदा नदी का जलस्तर कम हो चुका है, लेकिन भू कटान जारी है। डीएम शैलेंद्र सिंह ने हफ्ते भर पहले रैनी गांव पहुंचे थे। बाढ़ कटान पीड़ितों को राहत और बचाव कार्य का आश्वासन देते हुए बाढ़ खंड अधिकारियों को जलस्तर कम होते ही बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए थे। यह और बात है कि जलस्तर कम होने के बाद भी अब तक बचाव कार्य शुरू नहीं हुआ है। इससे ग्रामीणों में रोष है।
शारदा नदी का जलस्तर होने के बाद नदी ने भू कटान तेज कर दिया है। रैनी गांव में अबतक 12 घर नदी में समा चुके हैं। पिछले शनिवार को डीएम शैलेंद्र सिंह ट्रैक्टर से रैनी गांव पहुंचे और कटान पीड़ितों का हाल जाना था। हर संभव मदद का आश्वासन दिया था। डीएम के जाने के बाद तहसील प्रसाशन ने एसडीएम एस सुधाकरन की अगुवाई में कटान पीड़ितों को बाढ़ राहत किट बांटी। इसके बाद प्रशासन इस गांव को भूल गया। डीएम शैलेन्द्र सिंह ने बाढ़ खंड अधिकारियों को बचाव कार्य करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इस ओर बाढ़ खंड अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। रैनी गांव के बाढ़ पीड़ित कनौजी लाल वर्मा, राम गुलाम यादव, अवधेश यादव, ओमप्रकाश वर्मा, रामनरेश वर्मा, बनवारी लाल वर्मा, रामसिंह वर्मा, लक्ष्मीनारायण वर्मा, कमलेश जायसवाल, रामकिशोर जायसवाल आदि बताते हैं कि यदि बचाव कार्य शुरू नहीं किया गया तो वह दिन दूर नहीं जब रैनी गांव केवल नक्शे पर रह जाए। एसडीएम एस सुधाकरन ने बताया कि बाढ़ खंड अधिकारियों को बचाव कार्य शुरू करने के लिए पत्र जारी किया है। जल्द बचाव कार्य शुरू किया जाएगा।