अब जंगलों में अवैध घुसपैठ और वनापराध रोकने के लिए मानसून पेट्रोलिंग की तैयारी
बांकेगंज। मानसून से पहले झमाझम बारिश होने से दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगलों में गर्मी के मौसम में लगने वाली आग का खतरा टल गया है। बारिश होने से जमीन पर पड़ीं सूखी पत्तियां गीली हो गईं हैं। इससे आग लगने की आशंका अब न क बराबर है।
बसंत ऋतु में पतझड़ के बाद गर्मी के मौसम में जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। सूखी पत्तियों में आग लगने से वन संपदा को करोड़ों की क्षति होती है। वहीं वन्यजीवों की मौत का खतरा भी बढ़ जाता है। मार्च से जून तक यह खतरा बना रहता है। इस दौरान वन विभाग को काफी एहतियात बरतनी पड़ती है। अब प्री मानसून के आने से वन विभाग ने राहत की सांस ली है।
बारिश के बाद जंगल में घुसपैठ रोकना एक बड़ी चुनौती
बारिश होने के बाद दुधवा टाइगर रिजर्व में अब वन विभाग को जंगल में घुसपैठ रोकना एक बड़ी चुनौती होगा। बरसात के मौसम में जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगने वाला कटरूआ और धरती के फूल बीनने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण जंगल में जाते हैं। इसके अलावा बारिश के मौसम में जंगल के अंदर कई जगह जलभराव हो जाने से पेट्रोलिंग में भी दिक्कतें आती हैं। ऐसे में वनापराध बढ़ने की आशंका रहती है। इसे देखते हुए वन विभाग हर साल विशेष मानसून पेट्रोलिंग करता है।
मानसून से पहले हुई तेज बारिश से जंगल में आग लगने का खतरा कम हो गया है। अब वनापराध रोकने की चुनौती का सामना करना है। इसके लिए मानसून पेट्रोलिंग की तैयारी कर ली गई है। - डॉ. अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, बफरजोन