बदहाल बिजली व्यवस्था से जूझ रहे शहर के लोगों के लिए एक और बुरी खबर है। शहर में प्रस्तावित दो उपकेंद्र गांव में प्रस्तावित हो गए हैं। शहर में जमीन की कमी के कारण उपकेंद्रों के निर्माण में बड़ी बाधा पहुंची है। वहीं मीरपुर में बनने वाले तीसरे उपकेंद्र की जमीन के लिए अब तक प्रशासन से अनुमति नहीं मिल पाई है।
बिजली अधिकारियों के मुताबिक लखीमपुर शहर की ओवरलोड बिजली व्यवस्था को दूर करने के लिए तीन नए उपकेंद्रों का प्रस्ताव आया था। इनमें एक उपकेंद्र राजापुर, दूसरा रामापुर और तीसरा देवकली रोड पर बनाया जाना था। प्रस्ताव मिलने के बाद उपकेंद्रों के लिए जमीन की तलाश शुरू की गई। इस संबंध में जमीन उपलब्ध कराने के लिए बिजली अधिकारियों की ओर से कई बार प्रशासन को पत्र भी लिखा गया, लेकिन प्रशासन जमीन नहीं उपलब्ध करा पाया। जिसकी वजह से दो उपकेंद्रों का निर्माण लटक गया। अधिकारियों का कहना है कि देवकली रोड पर बनने वाले उपकेंद्र के लिए यहां से करीब आठ किलोमीटर दूर गांव सेमरी में जमीन मिली है। वहीं राजापुर में बनने वाले उपकेंद्र के लिए कालाआम में जगह मिली है। जिसके बाद गांव में दोनों उपकेंद्रों का निर्माण प्रस्तावित कर दिया गया है। रामापुर में जगह की कमी के कारण मीरपुर गांव में नए उपकेंद्र के निर्माण का प्रस्ताव किया गया है। लेकिन अभी इस प्रस्ताव को प्रशासन से अनुमति नहीं मिल पाई है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक सेमरी और कालाआम में बनने वाले उपकेंद्रों से सिर्फ शहरी उपकेंद्रों से निकलने वाले ग्रामीण फीडर ही जोड़े जाएंगे। लेकिन इससे शहर की आबादी को कोई राहत नहीं मिलने वाली है।
महेवागंज में भी नहीं मिल रही जमीन
33/11केवी का एक उपकेंद्र महेवागंज में भी प्रस्तावित है। बिजली अधिकारी कई महीनों से जमीन तलाश कर रहे हैं, लेकिन अब तक जमीन नहीं मिल पाई है। इससे महेवागंज में भी नया बिजली उपकेंद्र बनने की संभावना कम ही नजर आ रही है।
अधिशासी अभियंता रजनीकांत मिश्रा ने बताया कि शहरी क्षेत्र में कई महीने से जमीन की तलाश की जा रही थी, लेकिन जमीन नहीं मिल पाई। कालाआम और सेमरी में जमीन का प्रस्ताव मिल गया है। दोनों उपकेंद्र शहर के पास ही हैं। इससे शहरी उपकेंद्र से जुड़ा ग्रामीण फीडरों का बिजली लोड कम होगा। मीरपुर में उपकेंद्र बनाने के लिए जमीन का प्रस्ताव आया है, जिसके लिए जल्द प्रशासन से अनुमति ले ली जाएगी।