आढ़तिया बोले 50 से 60 फीसदी कम हुआ कारोबार
दूसरे प्रदेशों से आने वाली सब्जियों पर महंगाई की मार
एक हजार और पांच सौ के नोट बंद होने से सब्जी का कारोबार चौपट हो गया है। आढ़तियों की माने तो 50 से 60 फीसदी कारोबार कम हो गया है। भुगतान के लिए करेंसी उपलब्ध न होने से बाहर से आने वाली सब्जियों की आवक नहीं हो पा रही है। प्याज की आवक कम होने से रेट चढ़ गए हैं। दूसरा पहलू यह भी है कि मौसमी सब्जियों के दाम गिर गए हैं, जिससे किसानों की लागत नहीं वसूल हो पा रही है। मंडी में फूलगोभी के खरीददार नहीं मिल रहे हैं। तो गोदामों में आलू सड़ रहा है।
नोटबंदी और बैंक से निकासी की लिमिट से व्यापारी सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। राजापुर मंडी स्थित सब्जी आढ़तों पर गांव-देहात से आने वाले कारोबारियों की संख्या काफी कम हो गई है, जिससे सब्जियों का कारोबार अभी पटरी पर नहीं आ सका है। आढ़ती किसानों और व्यापारियों को भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। हालात इस कदर खराब हैं कि एक ठेलिया में लदे फूलगोभी की नीलामी महज 100 रुपये में हुई, जिससे किसान की लागत तो दूर किराया भी वसूल नहीं हुआ। लिहाजा किसान भी अपनी उपज बेचने के लिए मंडी आने से कतराने लगे हैं, जिससे मंडी परिसर में सन्नाटा है।
सब्जी आढ़ती मुन्ना चौधरी मांग में काफी कमी आ गई है। हरी सब्जियों के खरीदार नहीं मिल पा रहे हैं। तीन दिन से फूलगोभी स्टाक में हैं, लेकिन खरीदार न होने से औने-पौने दामों पर नीलामी छूट रही है।
आढ़ती अब्दुल शमी ने कहा कि पुराने नोट बंद होने से लोकल से आने वाली सब्जियों के रेट गिर गए हैं। जबकि दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियों के दाम बढ़े हैं। प्याज के रेट 600 से बढ़कर एक हजार रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं।
आढ़ती राजा ने बताया कि देहात से खरीददार न आने से आलू की बिक्री थम गई है। गोदामों में रखा आलू सडने लगा है। प्याज भी खराब हो रहा है।
सब्जी उत्पादक बबलू कासगंज के सोरो के रहने वाले हैं। राजापुर मंडी में आढ़तियों को बेचे आलू का भुगतान लेने के लिए दो दिन से डेरा डाले हैं, लेकिन बिक्री न होने से आढ़ती भुगतान नहीं दे पा रहे हैं।
सब्जी उत्पादक अंकु र ने बताया कि नए नोटों की कमी होने का हवाला देते हुए आढ़ती समय से भुगतान नहीं दे पा रहे हैं। इससे व्यापार प्रभावित हुआ है। आलू की सप्लाई एकाएक घटकर तीस फीसदी रह गई है।
सब्जी आढ़ती माधव सिंह कहते हैं कि नोटबंदी के बाद हालात एकदम खराब हुए थे, लेकिन पिछले दो-तीन दिन से सुधार हुआ है। अभी भी पर्याप्त मात्रा में छोटे नोट चलन में नहीं आए हैं, जिससे लेनदेन में परेशानी आ रही है।