त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दूसरे चरण के मतदान में चौंका देने वाले दृश्य भी देखने को मिले। लोकतंत्र के इस पर्व में फूलबेहड़ ब्लाक की नई सृजित ग्राम पंचायत मानपुर करदहिया के मतदाताओं ने वोट डालने के लिए डेंगी नाव पर बैठकर न सिर्फ अपनी जान जोखिम में डाली बल्कि उन्हें सात किलोमीटर पैदल भी चलना पड़ा। मानपुर के मतदाताओं का कहना है कि सूची में गड़बड़ी के कारण उन्हें प्रशासनिक उपेक्षा का दंश झेलना पड़ रहा है।
उनके मुताबिक त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले मूल ग्राम पंचायत गूम को तीन भागों में बांट दिया गया था। नई सृजित ग्राम पंचायतों में मानपुर करदहिया और जंगल नंबर 11 शामिल है। पंचायत चुनाव में पहली बार मानपुर करदहिया ग्राम पंचायत के करीब 200 मतदाताओं का वोट शारदा नदी पार ग्राम पंचायत जंगल नंबर 11 से जोड़ दिया गया। मतदाता सूची बनने के समय ग्रामीणों ने इस बात का विरोध भी किया था, लेकिन बीएलओ से लेकर उनके अफसर तक ने किसी की बात नहीं सुनी थी। मंगलवार को मतदान के दिन जब वोट डालने की बारी आई तो शारदा नदी पार करने के लिए उन्हें नाव का सहारा लेना पड़ा। करीब पांच सौ मीटर चौड़ी नदी पार करने के बाद ग्रामीण सात किलोमीटर दूर तक पैदल चले। तब जाकर कहीं इन मतदाताओं के वोट पड़ सके।
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जंगल नंबर 11 के मतदाताओं को मिली राहत
एक तरफ मानपुर करदहिया गांव के 200 मतदाताओं को वोट डालने के लिए दिक्कतें उठानी पड़ीं, वहीं जंगल नंबर 11 के मतदाताओं को कई सालों बाद वोट डालने के लिए शारदा नदी पार करने से राहत मिली है। दरअसल जब परिसीमन से पहले दोनों गांव गूम ग्राम पंचायत का हिस्सा थे, तब जंगल नंबर 11 के मतदाताओं को शारदा नदी पार कर मानपुर में वोट डालने के लिए आना पड़ता था।