गांव वाले बोले, पत्नी और चार बच्चों के हत्यारे को फांसी की सजा उसके मृत परिवार वालों के साथ इंसाफ
गांव अमेठी के मजरा नामदारपुरवा में छह साल पहले पांच लोगों का कत्ल हो गया था। शुक्रवार को पत्नी और चार बच्चों के हत्यारे रामानंद को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई। यह खबर गांव पहुंची तो लोगों को 21 जनवरी 2010 की वो काली रात एक बार फिर याद आ गई और वो सिहर उठे।
नामदारपुरवा गांव के बाहर बने रामानंद के घर में नेत्रहीन भांजी चांदनी और उसकी दादी रामदुलारी रहती हैं। गांव में और उसका कोई रिश्तेदार नहीं है या है भी तो कोई बताना नहीं चाहता। ग्रामीण एक ही बात कह रहे हैं, हम लोगों का उससे कोई मतलब नहीं है। गांव के दीनू, सुरेश और बबलू ने बहुत कुरेदने पर सिर्फ इतना कहा कि रामानंद ने बहुत गंदा काम किया। कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाकर उसकी मृत बीवी बच्चों के साथ इंसाफ किया है। पत्नी-बच्चों की हत्या करने वाले रामानंद को जल्द फांसी दी जानी चाहिए।
भांजी बोली, हो गई फांसी की सजा
नेत्रहीन भांजी चांदनी ने जैसे ही सुना कि रामानंद को फांसी की सजा सुना दी गई है। बोली, रामानंद वह सांप है जो अपने बच्चों को ही निगल चुका है। उसे बिल्कुल ठीक सजा सुनाई गई है।
मऊ में रहता है रामानंद का एकलौता बेटा अंबेडकर
धौरहरा। छह साल पूर्व रामानंद नें अपने एकलौता बेटे अंबेडकर को पीएसी जवान अनस्ते के हवाले कर दिया था, वह अब मऊ में रहता है। अनस्ते को रामानंद की सुरक्षा के लिए कुछ महीने तैनात किया गया था। तब अंबेडकर की उम्र महज दस साल थी। चांदनी के मुताबिक़ अंबेडकर अब 17 साल का है। रामानंद की 13 बीघा जमीन को नामदारपुरवा के प्रदीप ने आधे पर जोत रखा है। उसकी पढ़ाई का खर्च पीएसी जवान अनस्ते ही वहन करता है।
हाईकोर्ट से पुष्टि बाद रामानंद को होगी फांसी
लखीमपुर खीरी। पत्नी और चार मासूम बेटियों को मौत के घाट उतारने वाले रामानंद को फांसी के फंदे पर चढ़ाने के लिए जिला जज राजवीर सिंह की ओर से हाईकोर्ट लखनऊ बेंच में रेफरेंस भेजा गया है। वहीं शातिर अभियुक्तों का ब्योरा रख-रखाव के लिए बने अंगुष्ठ और अंगुल छाप प्रकोष्ठ की ओर से जिला जेल प्राधिकारियों को रिपोर्ट भेजी गई है।
फांसी की सजा को लेकर कचहरी में दिन भर चर्चा में रहे रामानंद का फैसला हर दूसरे व्यक्ति की जुबां पर रहा। रामानंद से करीब से परिचित वकील और वादकारियों ने भी उसको मिली सजा पर संतोष जाहिर किया। शुक्रवार को देरशाम फैसला होने की वजह से सजायाबी वारंट तो जिला जेल भेज दिया गया था। डेथ वारंट के रेफरेंस की पत्रावली अलग से बनाकर पुष्टि के लिए हाईकोर्ट भेजी गई है।
राज्य के खर्च पर होगी अपील
हाईकोर्ट के अधिवक्ता और न्यायमंच के जोनल कोआर्डिनेटर नीरज रस्तोगी ने बताया कि ऐसे दोषसिद्ध बंदियों को जिनके पास निजी साधन से दंड आदेश के खिलाफ अपील दाखिल करने की क्षमता नहीं होती है, राज्य की ओर से अपील कराई जाती है। इस बावत जेल विभाग की ओर शासनादेश पूर्व से ही जारी है।
शुरू हुई रामानंद की विशेष निगरानी
जेल अधीक्षक विनोद कुमार ने बताया कि सजायाबी वारंट के आधार पर जेल में रामानंद की सुरक्षा और विशेष निगरानी के लिए जेलर और डिप्टी जेलर को निर्देशित किया गया है, वह स्वयं भी उसके सुरक्षा और संरक्षा पर नजर रखें हैं ताकि रामानंद की ओर से कोई अप्रिय कदम न उठाया जा सके।
जेल में मिलेगी रामानंद को फैसले की प्रतिलिपि
शुक्रवार को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद रामानंद के चेहरे पर भय और पश्चाताप के निशान साफ दिखाई दे रहे थे, यही कारण है कि अटकती हुई आवाज में उसने हाथ जोड़कर गुहार लगाई। कानून के मुताबिक सजा पाने वाले बंदी को दंड आदेश की नि:शुल्क प्रतिलिपि दिलाने का प्रावधान है। दीवानी प्रतिलिपि विभाग के प्रधान प्रतिलिपिकार बाबूराम ने बताया, नियमानुसार रामानंद के मामले में भी यदि उसकी ओर से जेल विभाग के माध्यम से अर्जी आती है तो उसे फैसले की नि:शुल्क प्रतिलिपि दी जाएगी।
रामानंद का होगा जेल से ट्रांसफर
पहले ही एक बंदी की फरारी की वजह से जेल विभाग कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं है। सूत्र बताते हैं कि जेल विभाग की ओर से जल्दी ही रामानंद को बरेली सेंट्रल जेल अथवा अन्य किसी जेल में अंतरण करने के लिए विभाग को लिखा पढ़ी की जा रही है। वैसे भी खीरी की जिला जेल में पांच वर्ष तक की सजा पाए बंदियों को रखकर सजा कटवाने का प्रावधान है।